पटना [जेएनएन]। राजधानी का गर्दनीबाग अस्पताल अपने कारनामों से शुक्रवार को एक बार फिर चर्चा में आ गया। नसबंदी के बाद महिला के गर्भवती होने की सूचना पर अस्पताल में हड़कंप मच गया। सिविल सर्जन ने जांच करा कार्रवाई करने की बात कही है।

अस्पताल में बीती पांच फरवरी को गर्दनीबाग के राजपुताना मोहल्ले की आरती देवी ने नसबंदी कराई, उस समय उसके पेट में तीन माह का गर्भ था। उसने गर्भपात की दवा खा रखी थी। डॉक्टरों ने पूछने पर कहा कि सब-कुछ ठीक हो जाएगा और डॉ.अंजू ने नसबंदी कर दी। जब उसे गर्भ का अंदेशा हुआ तो  उसने नसबंदी कराने वाली महिला को जानकारी दी।

डॉक्टरों ने जांच की तो पाया कि आरती के गर्भ में चार माह का बच्चा पल रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर महिला चाहे तो गर्भपात करा सकती है। उसे जल्द ही इसकी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। 

अस्पताल की  निदेशक डॉ.मंजूला के अनुसार इस तरह का मामला संज्ञान में आया है। महिला ने नसबंदी के दौरान गर्भवती होने की सूचना डॉक्टरों को नहीं दी थी, जिस कारण ऐसी गलती हो गई।

सिविल सर्जन डा.प्रमोद कुमार झा ने कहा कि जांच कराई जाएगी कि आखिर ऐसी गलती कैसे हुई? बिना जांच के नसबंदी कैसे की गई? यह चिकित्सा एवं कानून की दृष्टि से उचित नहीं है। 

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