पिंटू कुमार, पटना। लॉकडाउन और कोविड के कहर ने आम आदमी की आदतों से लेकर पर्व-त्‍योहार का स्‍वरूप, बाजार की चाल सबकुछ को बदलकर रख दिया है। बदले माहौल में पटना के लोगों ने बीते सप्‍ताह सबसे फीका दशहरा मनाया है। अब कुछ दिनों में ही दिवाली भी आने वाली है, लेकिन इसे लेकर बाजार में बहुत उत्‍साह नहीं दिख रहा। खासकर शहर के कुम्‍हार इस बार दीयों के ऑर्डर नहीं मिलने से परेशान हैं। लॉकडाउन में मूर्तियों का बाजार मंदा रहने से उनके सामने पहले से ही दिक्‍कत है।

मंदिरी में नहीं मिले ऑर्डर, तार घाट में मिले तो पिछले साल से कम

मंदिरी में तो इस बार कुम्हारों को दीये बनाने के लिए ऑर्डर नहीं मिले हैं। तार घाट में हालत कुछ बेहतर है। हालांकि यहां भी ज्‍यादातर कुम्हारों को पिछले साल से कम ही ऑर्डर मिले हैं। इस बीच एक साल में दीयों की कीमत काफी बढ गई है। फिलहाल पटना में 300 से 400 रुपये प्रत‍ि हजार दीयों के होलसेल का रेट है। हमने कुछ कुम्‍हारों से उनके हालात पर बात की। आप भी जानिए क्‍या है उनकी व्‍यथा...

इस बार नहीं मिला दीयों का ऑर्डर

मनोज पंडित का कहना है कि इस बार दीये बनाने के लिए ऑर्डर नहीं मिला है। पहले एक हजार से पांच सौ दीये रोज लोग ले जाते थे। अब सौ-दो सौ दीये बेचना मुश्किल है। तार घाट के नंद किशोर पंडित का कहना है कि आम तौर पर दिवाली के लिए विश्वकर्मा पूजा से ही काम शुरू हो जाता है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं है।

दशहरा में नहीं मिला था दीये का ऑर्डर

अजय पंडित का कहना है कि अब तक 50 हजार दीये बनाने के  लिए ऑर्डर मिला है। यह पिछले साल से 20 हजार है। दुर्गापूजा में तो इस बार कोई ऑर्डर ही नहीं मिला। पिछले साल उन्‍होंने 20 हजार दीये दशहरा में ही बेच दिए थे।

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