पटना [एसए शाद]। पांच सीटों पर 21 अक्टूबर को होने वाला उपचुनाव एक प्रकार से नीतीश कुमार की प्रतिष्ठा से जुड़ा है। चार सीटें जदयू की रहीं हैं, जिसे फिर से हासिल करने के लिए पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है। इन चारों ही सीटों पर जदयू का मुकाबला राजद से है, हालांकि 2015 के विधानसभा चुनाव में दोनों दल साथ थे। एक अन्य सीट किशनगंज की है, जिसपर कांगे्रस का मुकाबला भाजपा से है। वहां एमआइएम के भी प्रत्याशी मैदान में हैं। 

जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष की हैसियत से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 17 एवं 18 अक्टूबर को इन सीटों पर जदयू के उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार करेंगे। वह भाजपा उम्मीदवार के लिए किशनगंज में भी चुनावी सभा को संबोधित करेंगे। वहीं, दूसरी ओर राजद के चुनाव प्रचार की कमान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने संभाल रखी है।

महागठबंधन में दो सीटों पर आपसी तालमेल नहीं बन पाया है, जिसका लाभ स्वाभाविक रूप से एनडीए को मिलेगा। हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा ने नाथनगर और विकासशील इंसान पार्टी ने सिमरी बख्तियारपुर में अपने उम्मीदवार उतार रखे हैं, हालांकि मैदान में महागठबंधन की ओर से राजद के प्रत्याशी हैं। 

जदयू की जिन चार सिटिंग सीटों पर उपचुनाव हो रहा है, उनमें से नाथनगर पर जदयू ने 2015 में करीब आठ हजार वोटों से जीत दर्ज की थी। मुकाबला लोजपा से था। इस बार लोजपा जदयू के साथ है। महागठबंधन के वोट में सेंध मारने के लिए यहां हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा के अलावा नवगठित वंचित समाज पार्टी के उम्मीदवार सक्रिय हैं।

वंचित समाज पार्टी का आधार वोट भी वही है जिस पर राजद निर्भर है। बेलहर में पिछली बार जदयू ने भाजपा उम्मीदवार को करीब 16 हजार मतों से पराजित किया था। इस बार भाजपा और जदयू एकसाथ हैं। सिमरी बख्तियारपुर में भी ऐसी ही स्थिति है।

पिछली बार जदयू ने लोजपा उम्मीदवार पर करीब 38 हजार वोटों के बड़े मार्जिन से जीत दर्ज की थी। लोजपा इस बार फिर जदयू के साथ है। दरौंदा में जदयू ने करीब 13 हजार मतों से भाजपा को हराया था। इन चारों ही सीट पर राजद दूसरे नंबर पर नहीं था। नीतीश कुमार की पार्टी ने या तो भाजपा या लोजपा के उम्मीदवार को पराजित किया था। 

Posted By: Kajal Kumari

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप