पटना [जेएनएन]। राजधानी पटना में डेंगू ने तेजी से पांव पसारना शुरू कर दिया है। गुरुवार को पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) में डेंगू मरीजों की संख्या 40 पहुंच गई। इसके अलावा शहर में जेई और चिकुनगुनिया का प्रकोप भी लगातार बढ़ते जा रहा है। अब तक पीएमसीएच में जेई के 12 एवं चिकुनगुनिया के 10 मरीज मिले हैं।

 

डेंगू, चिकुनगुनिया एवं जेई के मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि होने से स्वास्थ्य विभाग भी परेशान है। शहर में जलजमाव एवं गंदगी के कारण बीमारी तेजी से फैल रही है। 

 

पीएमसीएच के माइक्रो बायोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ.उमेश शर्मा ने बताया कि अब तक पीएमसीएच में इस सीजन में 40 डेंगू मरीजों की पहचान हुई है। इसके अलावा एक दर्जन जेई एवं दस मरीज चिकुनगुनिया के भी मिले हैं। पिछले कुछ दिनों से अस्पताल में स्वाइन फ्लू के मरीज भी जांच के लिए आ रहे हैं। हालांकि जांच के बाद सिर्फ एक में ही स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। एक अन्य मरीज का नमूना अभी जांच के लिए भेजा गया है। 


अब रविवार को भी होगी जांच 

मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पीएमसीएच का माइक्रो बायोलॉजी विभाग अब रविवार को भी खुला रहेगा। इससे राज्य के कोने-कोने से आने वाले मरीजों को डेंगू, जेई और चिकनगुनिया की जांच कराने में सहूलियत होगी। माइक्रो बायोलॉजी विभाग के अध्यक्ष ने कॉलेज के प्राचार्य से चार और टेक्नीशियन की मांग की है। विभागाध्यक्ष का कहना है कि रविवार को भी विभाग खुला रखने से टेक्नीशियन बढ़ाने की आवश्यकता है। 

 

डेंगू के 3, जेई 2 एवं चिकुनगुनिया के मिले 1 मरीज 

पीएमसीएच में गुरुवार को डेंगू के तीन, जेई के दो तथा चिकुनगुनिया के तीन मरीज मिले हैं। डेंगू के तीनों मरीज पटना जिले के हैं। दो मरीज महेंद्रू एवं एक मरीज शाहपुर मनेर का रहने वाला है। वहीं जेई का एक मरीज रोहतास का तो दूसरा शेखपुरा का रहने वाला है। चिकुनगुनिया का मरीज लोदीपुर पटना का रहने वाला है। इसे स्वाइन फ्लू होने की भी आशंका व्यक्त की जा रही है। 

 

डेंगू के बढ़ते प्रकोप पर रोक लगाने के लिए शोध शुरू

सूबे में बढ़ते डेंगू के प्रकोप और मरीजों की हो रही मौत पर रोक लगाने और बीमारी के बारे में अधिक से अधिक  जानकारी हासिल करने के लिए सूबे के सबसे बड़े अस्पताल पीएमसीएच में शोध प्रारंभ किया गया है। यहां पर शोध कॉलेज के माइक्रो बायोलॉजी विभाग द्वारा शोध किया जाएगा। शोध टीम का नेतृत्व करेंगे माइक्रो बायोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ.उमेश शर्मा। डॉ.शर्मा के नेतृत्व में विभाग के वैज्ञानिक काम करेंगे। 

 

पीएमसीएच के प्राचार्य डॉ.विजय कुमार गुप्ता का कहना है कि डेंगू की बीमारी प्रतिवर्ष सैकड़ों लोगों को अपना शिकार बनाती है। इसके कारण एवं निदान के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। बरसात के मौसम में इस बीमारी का प्रकोप काफी बढ़ जाता है। इस बीमारी पर नियंत्रण के लिए पीएमसीएच में अनुसंधान शुरू किया गया है।

 

माइक्रो बायोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ.शर्मा का कहना है कि पिछले वर्ष पीएमसीएच में डेंगू के 2600 मरीज आए थे। राज्य में डेंगू अब केवल पटना तक सीमित नहीं रहा है। बल्कि डेंगू के मरीज पटना से लेकर पूर्णिया एवं चम्पारण तक पाए जा रहे हैं। इस बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करना बहुत जरूरी है। लोगों को जागरूक कर डेंगू की बीमारी से बहुतहद तक बचाया जा सकता है। 

 

बिहार में डेंगू पर शोध कर रहे पीएमसीएच के चिकित्सक डॉ.स्वप्निल का कहना है कि प्रदेश में जिस तरह डेंगू का प्रकोप दिखाई पड़ रहा है। यह भविष्य के लिए अत्यंत घातक है। डेंगू बिहार के लिए एक गंभीर बीमारी बन चुकी है। इसके मरीज पूरे प्रदेश से पीएमसीएच में आ रहे हैं। अब तक मिले आंकड़ों के अनुसार डेंगू राज्य में सबसे बड़ी मच्छर जनित मौसमी बीमारी है। उसके बाद जेई एवं चिकुनगुनिया का स्थान आता है। 

 

सावधानी से बीमारी पर नियंत्रण संभव 

डॉ.स्वप्निल का कहना है कि सावधानी से डेंगू की बीमारी पर नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है। इसके लिए जरूरी गांव से लेकर शहर तक बरसात से पहले जागरूकता अभियान चलाया जाए। राज्य के सरकारी एवं निजी स्कूलों के छात्र-छात्राओं को भी जागरूकता अभियान में शामिल किया जाए। मच्छर मारने वाली एजेंसियों को सक्रिय किया जाए। मच्छर मारने वाली दवाओं का समय-समय पर छिड़काव किया जाए। इससे सूबे में डेंगू के प्रकोप को बहुतहद तक कम किया जा सकता है। 

 

Posted By: Ravi Ranjan

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