पटना, जेएनएन। पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) का डाटा ऑनलाइन किया जाएगा। यहां इलाज कराने वाले हर मरीज का एक यूनीक नंबर होगा। मरीज के पंजीयन के साथ ही जांच रिपोर्ट भी जोड़ दी जाएगी। उसके बारे में कोई भी डॉक्टर दुनिया के किसी भी कोने में बैठकर देख सकता है।

विश्व बैंक के सहयोग से हो रहा बदलाव

पीएमसीएच के प्राचार्य डॉ. विद्यापति चौधरी का कहना है कि विश्व बैंक के सहयोग से पीएमसीएच को नई तकनीक से युक्त बनाया जाएगा। अस्पताल को आइटी फ्रेंडली बनाने के लिए आंकड़ों का अपडेट किया जाएगा। यहां पर पंजीयन से लेकर जांच एवं इलाज तक सबकुछ एडवांस होगा।

विश्व बैंक की टीम ने किया अस्पताल का निरीक्षण

पीएमसीएच को एडवांस बनाने के लिए मंगलवार को विश्व बैंक की टीम ने अस्पताल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पीएमसीएच का ओपीडी, पंजीयन काउंटर, इमरजेंसी, वार्ड, पैथोलॉजी आदि का निरीक्षण किया। विश्व बैंक के प्रतिनिधि डॉ. सुरेश मोहम्मद के नेतृत्व में निरीक्षण किया गया।

मरीजों के डाटा संग्रह पर जोर

विश्व बैंक की टीम ने अस्पताल प्रशासन को सलाह दी कि मरीजों के डाटा संग्रह पर जोर दिया जाए। साथ ही मौसमी बीमारियों के अध्ययन पर विशेष जोर हो। पटना देश के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में से एक है। यहां लोगों के जीवन पर प्रदूषण का क्या असर पड़ रहा है, इसका भी अध्ययन बहुत जरूरी है। साथ ही डायरिया का प्रकोप भी यहां पर समय-समय पर बढ़ जाता है, उसका भी अध्ययन होना चाहिए। बिहार में किसी मौसम में लोगों की बीमारी ज्यादा होती है, उसका भी डाटा संग्रह होना चाहिए।

30 डायलिसिस मशीनें उद्घाटन के इंतजार में

प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) में 30 डायलिसिस मशीनें एक माह से उद्घाटन का इंतजार कर रही हैं। पिछले 29 नवंबर को उद्घाटन की तिथि निर्धारित भी की गई थी, मगर अंत समय पर तैयारी अधूरी रहने के कारण टाल दिया गया। पीएमसीएच में डायलिसिस मशीनों को लेकर एक बार फिर समाजसेवी विकास चंद्र उर्फ गुड्डू बाबा ने पटना उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। उसके बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया है।

निगम ने पीएमसीएच को दी थी 30 डायलिसिस मशीनें

स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सा सेवा एवं आधारभूत संरचना निगम ने 30 नई डायलिसिस मशीनें दी थी। इससे उम्मीद थी कि जल्द से जल्द इसका लाभ मरीजों को मिलेगा, मगर मशीनों को सेट करने में काफी समय लग गया। अभी भी मशीनें उद्घाटन के इंतजार में हैं।

Posted By: Akshay Pandey

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