सासाराम [ब्रजेश पाठक]। इंसान की सोच और मेहनत उसे मुकाम तक पहुंचा ही देती है। बिहार के गया जिले के दशरथ मांझी का नाम तो सभी ने सुना है, जिन्‍होंने पहाड़ को काटकर रास्‍ता बना दिया। उसी तरह डेहरी प्रखंड के भड़कुडिया गांव के 60 ग्रामीणों ने संकल्प लिया तो पहाड़ काटकर 12 सौ फीट ऊंची पहाड़ी पर सीढिय़ां बनाकर स्थापित भगवान तिलेश्वरनाथ तक पहुंचने का रास्ता बन गया। प्रशासन हैरान है, ग्रामीणों के जज्बे की सराहना कर रहा है।

ऊबड़-खाबड़ चट्टानों से होकर किसी तरह पहुंचते थे श्रद्धालु

जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर गोड़ैला पहाड़ी की चोटी पर स्थित तिलेश्वर धाम मंदिर तक जाने के लिए कोई सुगम रास्ता नहीं था। श्रद्धालु ऊबड़-खाबड़ चट्टानों से होकर किसी तरह पहुंचते थे। ज्यादातर श्रद्धालु तो बीच पहाड़ी से बिना दर्शन किए लौट जाते थे। ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों से लेकर डीएम तक से गुहार लगाई, लेकिन आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला। इसके बाद आपस में चंदा किया और गांव के बुजुर्ग, नौजवान और महिलाओं ने संकल्प लेकर श्रमदान कर इस कार्य को पूरा कर दिखाया।

ये है मान्यता

पौराणिक मान्यता यह है कि तिलेश्वर नाथ शिवलिंग की स्थापना त्रेता युग में ताड़का राक्षसी ने की थी। वह प्रतिदिन बक्सर से गंगाजल लेकर यहां जलाभिषेक करने आती थी। महाशिवरात्रि पर रोहतास के अलावा बक्सर, भोजपुर व कैमूर के हजारों श्रद्धालु 1200 फीट ऊंची पहाड़ी का ऊबड़- खाबड़ चट्टानी रास्ता तय कर जलाभिषेक करने पहुंचते थे।

पांच दर्जन से अधिक का श्रमदान

ग्रामीणों के अनुसार इस कार्य में पांच दर्जन से ज्यादा लोगों ने श्रमदान किया। मंदिर के विकास कार्य में लगे सुनील कुमार, धनजी धैर्य, शशि पाल आदि ने बताया कि सीढ़ी बनने से श्रद्धालुओं को काफी सहूलियत होगी। वहीं इस संबंध में डेहरी के एसडीएम पंकज पटेल ने बताया कि ग्रामीणों के श्रमदान से गोड़ैला तिलेश्वर महादेव तक 1200 फीट ऊंची पहाड़ी पर सीढ़ी बनाना प्रशंसनीय कार्य है। शिवरात्रि में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन हरसंभव सहयोग करेगा।

By Ravi Ranjan