पटना । बोधगया सीरियल बम ब्लास्ट मामले में 25 मई को फैसला आएगा। दोनों पक्षों की ओर से लिखित बहस अदालत को शुक्रवार को सौंप दिए जाने के बाद एनआइए कोर्ट के विशेष जज मनोज कुमार सिन्हा ने फैसले की तारीख मुकर्रर कर दी। शुक्रवार को ही बचाव पक्ष की बहस भी समाप्त हुई। इस मामले में एनआइए का आने वाला यह पहला और अहम फैसला होगा।

एनआइए की ओर से विशेष लोक अभियोजक ललन प्रसाद सिन्हा ने लिखित बहस दायर की। उन्होंने बताया कि मामले में अभियोजन की ओर से 90 गवाहों ने गवाही दी है।

मामले में उमेर सिद्दीकी, अजहर उद्दीन कुरैशी, हैदर अली, मुजबुल्लाह अंसारी और इम्तियाज अंसारी आरोपित हैं। ये सभी अभियुक्त गांधी मैदान सीरियल बम ब्लास्ट के भी आरोपित हैं।

एनआइए ने मामले में छह आरोपितों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। छठा आरोपित नाबालिग था। इस कारण उसके मुकदमे को ट्रायल के लिये पटना सिटी के गायघाट स्थित जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में भेज दिया गया था। यहां से उस नाबालिग को बोधगया व गांधी मैदान सीरियल बम ब्लास्ट मामले में 3-3 वर्ष की सजा हो चुकी है। उमेर और अजहर छत्तीसगढ़ के रायपुर के निवासी हैं जबकि अन्य तीन झारखंड इलाके के निवासी हैं।

घटना 7 जुलाई 2013 को बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर के आसपास सुबह करीब छह बजे घटी थी। घटना में दो भिक्षु घायल हो गये थे।

सभी आरोपित म्यांमार में रो¨हग्या मुसलमान पर हो रहे अत्याचार का बदला लेना चाहते थे। विशेष लोक अभियोजक सिन्हा के अनुसार हैदर अली ने इस घटना को अंजाम देने के लिये षडयंत्र रचा जिसमें उमेर और अजहर शामिल हो गए।

हैदर अली सिमी संगठन का सक्रिय सदस्य था। वह रांची में रहकर संगठन का कार्य देखता था। संगठन के अन्य कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करता था। हैदर अली और उमेर ने बोधगया बम ब्लास्ट का ताना-बाना बुना। अन्य चार अभियुक्त भी इस षड्यंत्र में शामिल हो गए। षडयंत्र में सभी ने अपनी-अपनी भूमिका अदा की।

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Posted By: Jagran

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