पटना। अवैध तरीके से शिक्षक व शिक्षकेत्तर कर्मियों की नियुक्ति मामले में विजिलेंस की विशेष अदालत ने गुरुवार को मगध विश्वविद्यालय के तत्कालीन प्रतिनिधि और मसौढ़ी स्थित डीएन कॉलेज के वर्तमान प्राचार्य दिनेश प्रसाद सिन्हा को जमानत देने से इन्कार कर दिया। अदालत ने आरोपित की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है।

आवेदन का विरोध करते हुए विजिलेंस की विशेष कनीय लोक अभियोजक आनंदी सिंह ने अदालत को बताया कि मामले में विजिलेंस ने दो दिसंबर 2016 को आरोपित आवेदक सहित अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। विशेष लोक अभियोजक ने अदालत को जानकारी दी कि मानव संसाधन विभाग ने एक पत्र जारी कर विश्वविद्यालय को कहा था कि किसी भी शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की नई नियुक्ति नहीं की जानी है। बावजूद इसके आरोपितों ने एक-दूसरे से साठगांठ कर वर्ष 2005 व 2007 में करीब 200 शिक्षकों व शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की नई नियुक्ति कर दी। आरोपितों ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मापदंड का पालन नहीं किया। नियुक्त हुए लोगों में कई शैक्षणिक स्तर पर अयोग्य थे। इतना ही नहीं आरोपितों ने नियुक्त शिक्षक व शिक्षकेत्तर कर्मियों को वेतन के मद में वर्ष 2005 से 2008 के बीच 16.30 लाख रुपये भी दे दिए थे।

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दुष्कर्मी को 11 वर्ष की सजा

जासं, पटना : नाबालिग के साथ अप्राकृतिक यौनाचार करने के मामले में गुरुवार को पॉक्सो की विशेष अदालत ने शाहपुर थाना क्षेत्र के सरारी गांव के निवासी मोहम्मद अरमान को 11 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने आरोपित के खिलाफ 20 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। आरोप है कि आरोपित ने 15 मई 2018 को छह वर्षीय नाबालिग के साथ अप्राकृतिक यौनाचार किया था।

Posted By: Jagran

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