पटना, राज्य ब्यूरो। बिहार के प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना के तहत काम कर रहे रसोइयों के मानदेय में राज्य सरकार वृद्धि करने के पक्ष में है। अभी उन्हें 1500 रुपये प्रतिमाह मिल रहे हैं, जिसे बढ़ाकर 2000 रुपये करने का प्रस्ताव राज्य ने केंद्र को भेज रखा है। 

शिक्षा मंत्री ने दिया जवाब

विधानसभा में भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी, श्यामबाबू प्रसाद यादव, नितिन नवीन, सुनील कुमार और विनय बिहारी के ध्यानाकर्षण सूचना पर सरकार की ओर से जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन वर्मा ने बताया कि राज्य के मध्य एवं प्राथमिक विद्यालयों में काम करने वाले सभी रसोइयों को प्रतिमाह केंद्र सरकार की ओर से छह सौ रुपये और राज्य सरकार की ओर से चार सौ रुपये दिए जाते हैं। इसके अलावा राज्य सरकार अपनी निधि से पांच सौ रुपये अतिरिक्त देती है। इस तरह प्रतिमाह उन्हें डेढ़ हजार रुपये मिलते हैं। इनमें नौ सौ रुपये राज्य सरकार देती है।

केंद्र को लिखा गया है पत्र

मंत्री ने कहा कि न्यूनतम दो हजार रुपये करने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा गया है, लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है। इस पर मिथिलेश तिवारी ने आग्र्रह किया कि राज्य सरकार अपनी तरफ से प्रतिदिन 268 रुपये मानदेय कर दे। रसोइए मां की तरह बच्चों के लिए खाना बनाते हैं। इस कार्य में वह निपुण भी हैं। फिर भी उन्हें अकुशल मजदूरों के लिए तय पैसे भी नहीं मिलते हैं। 

वार्ड सचिवों के लिए मानदेय तय नहीं

राज्य के सभी जिलों में कार्यरत करीब एक लाख 14 हजार वार्ड सचिवों को मानदेय देने की मांग का जवाब देते हुए पंचायती राज मंत्री कपिलदेव कामत ने कहा कि उनके लिए कोई मानदेय तय नहीं है। वार्ड सचिव जनभागीदारी के तहत काम करते हैं। वार्ड क्रियान्वयन समिति को मिलने वाले 15 सौ रुपये में से आपसी समझ के आधार पर उन्हें दिया जा सकता है। विधायक राजेश कुमार, समीर महासेठ, मदन मोहन तिवारी, शकील अहमद खां, विजय प्रकाश, पूनम कुमारी, सुदर्शन कुमार, सुधीर कुमार एवं आनंद शंकर की ध्यानाकर्षण पर मंत्री जवाब दे रहे थे। 

Posted By: Rajesh Thakur

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