पटना, आनलाइन डेस्‍क। Congress President Election: कांग्रेस के नए अध्यक्ष (New Congress President) का फैसला 19 अक्टूबर को हो जाएगा। इसके चुनाव को लेकर अशोक गहलौत, शशि थरूर, मुकुल वासनिक, मल्लिकार्जुन खड़गे, दिग्‍वियजय सिंह व केसी वेणुगोपाल के नाम चर्चा में हैं या रहे हैं। बिहार की मीरा कुमार की भी चर्चा है। कांग्रेस के अधिकांश अध्‍यक्ष नेहरू-गांधी परिवार (Nehru-Gandhi Family) से ही रहे हैं, लेकिन स्‍वतंत्रता के बाद बिहार के जगजीवन राम व सीताराम केसरी तथा स्‍वतंत्रता पूर्व हसन इमाम व डा. राजेंद्र प्रसाद इस पद पर रहे थे। इनमें सीताराम केसरी को जबरन पद से हटा दिया गया था।

बिहार ने दिए कांग्रेस के चार अध्‍यक्ष

कांग्रेस के अधिकांश अध्‍यक्ष नेहरू-गांधी परिवार से ही रहे हैं, लेकिन बिहार ने भी पार्टी को चार अध्‍यक्ष दिए हैं। उनमें पटना के नेउरा गांव में पले-बढ़े हसन इमाम भी शामिल रहे। वे देश के मशहूर वकील व कलकत्‍ता हाईकोर्ट में जज भी रहे। मार्च 1916 में पटना हाईकोर्ट की स्थापना के बाद वे यहां वकालत करने लगे। अलग बिहार राज्य की स्थापना में उनका योगदान उल्‍लेखनीय रहा। गांधी जी के साथ स्‍वतंत्रता आंदोलन में उनकी महत्‍वपूर्ण भूमिका रही। उन्‍होंने 1918 में बंबई में आयोजित कांग्रेस के विशेष सत्र की अध्यक्षता की।

दो बार अध्‍यक्ष बने डा. राजेंद्र प्रसाद

स्‍वतंत्रता पूर्व अध्‍यक्ष बनने वालों में देश के पहले राष्‍ट्रपति रहे बिहार के वर्तमान सिवाल जिले के जीरादेई में जन्‍में व पले-बढ़े डा. राजेंद्र प्रसाद भी शामिल रहे। स्वतंत्रता आंदोलन में वे वकील बनने के साथ ही कूद पड़े। साल 1934 में वे कांग्रेस के मुंबई अधिवेशन में अध्यक्ष चुने गये। नेताजी सुभाषचंद्र बोस के अध्यक्ष पद से इस्‍तीफा देने के बाद 1939 में उन्‍होंने कांग्रेस अध्यक्ष का पदभार दोबारा संभाला था। स्‍वतंत्रता के बाद वे देश के पहले राष्ट्रपति बने।

1969 में अध्‍यक्ष बने जगजीवन राम

स्‍वतंत्रता के बाद कांग्रेस के अध्‍यक्ष बनने वालों में जगजीवन राम पहले रहे। स्‍वतंत्रता आंदोलन में शामिल रहे जगजीवन राम समय-समय पर महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू एवं श्रीमती इंदिरा गांधी के अहम सलाहकार रहे। साल 1966 में कांग्रेस के विभाजन के बाद वे इंदिरा गांधी के साथ रहे। 1969 में उन्‍हें पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया। 1971 के चुनाव में कांग्रेस की ऐतिहासिक जीत का श्रेय इंदिरा गांधी ने उन्‍हें ही दिया था। कांग्रेस की विभिन्‍न सरकारों में वे कई विभगों के मंत्री रहे।

सीताराम केसरी को जबरन हटाया

अब बात बिहार से कांग्रेस के चौथे और अभी तक के अंतिम अध्‍यक्ष सीताराम केसरी की। पटना के दानापुर के रहने वाले सीताराम केसरी की राष्ट्रीय पहचान थी। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कई बार जेल गए। साल 1967 में कटिहार लोकसभा सीट से सांसद बने। पांच बार राज्यसभा के सदस्य भी रहे। साल 1973 में बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष तो साल 1980 में कांग्रेस के कोषाध्यक्ष बनाए गए। जवाहर लाल नेहरू से लेकर पीवी नरसिंह राव तक के काम में कांग्रेस में उनका बड़ा कद रहा, लेकिन 1997 में सोनिया गांधी के कांग्रेस में आते ही उनके पर कतरे जाने लगे। एक साल के अंदर ही मार्च 1998 में कांग्रेस कार्य समिति ने उन्‍हें पद से जबरन हटा दिया।

केसरी पर फोड़ा हार का ठीकरा

12वीं लोकसभा चुनाव के वक्‍त सोनिया गांधी ने कांग्रेस के लिए जमकर प्रचार किया, लेकिन पार्टी हार गई। इसका ठीकरा सीताराम केसरी पर फोड़ा गया। आरोप लगा कि केसरी ने चुनाव में एक भी रैली नहीं की। उ नपर सवर्ण नेताओं को तरजीह नहीं देने के आरोप भी लगे। इसके बाद नेहरु-गांधी परिवार के चाहने वालों कांग्रेसियों ने केसरी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उनपर पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ने का दबाव बनाया गया, लेकिन उन्‍होंने इनकार कर दिया। इसके बाद कांग्रेस कार्य समिति ने उन्‍हें पद से जबरन हटाया।

कांग्रेसियों ने ही कर दिया था बंद

इस संबंध में एक मजेदार किस्‍सा भी जानिए। कांग्रेस कार्य समिति ने सोनिया को अध्‍यक्ष बनाने के लिए पार्टी की नियमावली में बदलाव किया। सोनिया गांधी को अध्यक्ष बनाने के फैसले से गुस्‍साए सीताराम केसरी अपने कार्यालय चले गए तो कांग्रेसियों ने ही उन्‍हें वहीं बंद कर दिया। कहते हैं कि साल 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने इस घटना की चर्चा अपने भाषण में की थी।

Edited By: Amit Alok

जागरण फॉलो करें और रहे हर खबर से अपडेट