पटना [सुनील राज]। 2019 के लोकसभा चुनाव की सुगबुगाहट शुरू होने के साथ ही बिहार कांग्रेस भी चुनावी तैयारियों में जुट गई है। फिलहाल पार्टी ने सारा फोकस संगठन की मजबूती पर केंद्रित किया है। चुनावी समर में कूदने के पहले पार्टी 40 लोकसभा क्षेत्र में अपनी हैसियत का आकलन कर रही है। यह पता करने के प्रयास हो रहे हैं कि कांग्रेस की स्थिति किस सीट पर कैसी है। इसके बाद ही यूपीए के सहयोगी के साथ बैठ सीटों के बंटवारे पर मंथन होगा।

बिहार कांग्रेस के प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल ने 2019 के लोकसभा चुनाव में जीत की जो रणनीति बनाई है, उस पर अमल करने के लिए प्रदेश के 38 जिलों को दो भाग में बांटा गया है। उत्तर और दक्षिण बिहार। उत्तर बिहार के लिए पार्टी ने राजेश लिलौटिया और दक्षिण बिहार के लिए बीरेंद्र सिंह राठौर को सचिव नियुक्त किया है। दोनों सचिवों को 19-19 जिलों का दायित्व दिया गया है। दोनों अधिकारी महीने भर के अंदर जिलावार पार्टी की ताकत का अंदाजा लगाएंगे। जैसे जिले में वोट प्रतिशत कितना है, किस जाति बहुल क्षेत्र में संबंधित जिला आता है, उक्त जिले में पार्टी सदस्यता की स्थिति क्या है और इलाके की प्रमुख समस्याएं क्या हैं।

ऐसे तमाम आकलन की रिपोर्ट तैयार कर दोनों सचिव बिहार प्रभारी गोहिल और प्रभारी अध्यक्ष कौकब कादरी को सौंपेंगे। जिसके बाद यह रिपोर्ट आलाकमान को भेजी जाएगी। रिपोर्ट में दिए तथ्यों के आधार पर तय किया जाएगा कि कांग्रेस को किन-किन लोकसभा सीटों पर अपना दावा करना है।

प्रभारी अध्यक्ष कौकब कादरी कहते हैं कि पार्टी ने हाल के दिनों में देश के स्तर पर अच्छा प्रदर्शन किया है। लोगों का रुझान एक बार फिर कांग्रेस के प्रति बढ़ा है। भाजपा-जदयू की नीतियों को लेकर बिहार में काफी आक्रोश है। पार्टी को लोगों के इस आक्रोश का फायदा निश्चित रूप से चुनाव में मिलेगा।

कादरी कहते हैं कि 10 जून से बिहार प्रभारी गोहिल बिहार में होंगे। उस दिन तक जितने जिलों का आकलन किया जा चुका है उसकी रिपोर्ट हमें मिल जाएगी। इसके बाद हम तय करेंगे कि आगे के लिए हमें क्या रणनीति निर्धारित करनी है। हम अपने आकलन के आधार पर सहयोगी दल से सीट बंटवारे पर चर्चा करेंगे।

Posted By: Ravi Ranjan

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