शेखपुरा, जागरण संवाददाता। Bihar Farmer News: किसानों के खेत पर जबरन कब्जा कर कांग्रेस घास के नाम से प्रसिद्ध खरपतवार तेजी से प्रसार करते हुए उसे बंजर बना रही है। इसे गाजर घास भी कहते हैं। इस खरपतवार के नाश को लेकर किसान के द्वारा किया गया प्रयास लगातार असफल हो रहा है। वहीं इसके संपर्क में आने से त्वचा रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। जिले के गांवों में इसका प्रसार व्यापक हो चुका है। इसको लेकर बरबीघा के शेरपर गांव निवासी किसान धर्मराज सिंह व रुस्तम कुमार ने बताया कि खेत में इसके फैलाव से काफी परेशानी हो रही है।

क्यों कहा जाता है कांग्रेस घास

इस संबंध में कृषि विशेषज्ञ शांति भूषण ने बताया कि इस घास के बीज को पांच दशक पहले भारत में अकाल की स्थिति के दौरान अमेरिका से आए गेहूं में पाया गया था। उस समय कांग्रेस की सरकार थी अत: इसे कांग्रेस घास लोग कहने लगे। उधर, कृषि विभाग में कृषि समन्वयक संदीप कुमार ने बताया कि एक पौधा एक हजार से लेकर 50 हजार तक अति सूक्ष्म बीज पैदा करता है। यह तेजी से बढ़ता और विकास करता है। इसे अत्यधिक खाने से मवेशी की जान भी जा सकती है। यह 30 से 40 फीसद तक पैदावार में कम कर देती है।

त्वचा और सांस रोग का कारण है यह घास

सिविल सर्जन डा. कृष्ण मुरारी प्रसाद सिंह ने बताया कि गाजर घास काफी एलर्जी वाली है। इसके संपर्क में आने से बचना चाहिए। इस घास के संपर्क में आने से डर्मेटाइटिस, एक्जिमा, एलर्जी, बुखार, दमा आदि हो सकता है।

क्या है बचाव के उपाय

इसके बचाव के बारे में जानकारी देते हुए विशेषज्ञ शांति भूषण ने बताया कि फूल आने से पहले ही सुरक्षात्मक उपाय अपनाकर इसे खेत से नष्ट कर देना चाहिए। खर पतवार नाशक रसायन का प्रयोग भी इस पर कारगर सिद्ध होता है।