पटना । राजधानी के आइएमए हॉल में गुरुवार को आइसा, एआइएसएफ, एसएफआइ, डीवाईएफआइ सहित कई छात्र संगठनों ने शिक्षा-रोजगार के मसले पर कन्वेंशन आयोजित किया। पटना यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफेसर विनय कंठ ने कहा कि शिक्षा के प्रति केंद्र और राज्य सरकार दोनों में कोई फर्क नहीं है। दोनों ही सरकारे शिक्षा को बाजार के हवाले कर देना चाहती है।

पीयू में इतिहास की प्रोफेसर डेजी नारायण ने कहा कि केंद्र सरकार उच्च शिक्षा को समाप्त कर देना चाहती है। एमफिल, पीएचडी तथा नेट की सीटों में कटौती इसके प्रमाण हैं। उच्च शिक्षा से छात्रों को बेदखल कर कॉरपोरेट के लिए युवाओं को सस्ता श्रम बनाने में सरकार जुटी है। सूबे की सरकार भी केंद्र के नक्शे कदम पर चलते हुए वंचित समुदाय की छात्रवृत्ति में कटौती कर रही है। प्रो.नवल किशोर चौधरी ने कहा कि समान स्कूल प्रणाली लागू किए बिना राज्य की बदहाल शिक्षा व्यवस्था दुरुस्त नहीं हो सकती है। मौजूदा परिस्थिति में व्यापक हस्तक्षेप के लिए छात्र-युवा संगठनों की एकजुटता जरूरी है।

एआइएसएफ के राज्य सचिव सुशील कुमार, आइसा के राज्य अध्यक्ष मोख्तार, आइएसवाईए के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमर आजाद, एआइवाईएफ के राज्य सचिव रौशन कुमार सिन्हा, आरवाईए के राज्य सचिव नवीन कुमार, डीवाईएफआइ के राज्य अध्यक्ष मनोज चंद्रवंशी आदि ने एक साथ आंदोलन करने का फैसला लिया। मौके पर विकास झा, सुशील उमराज, रामजी यादव, सुभाष पासवान, रंजीत पंडित, बाबू साहब , आलोक, संदीप सहित सैकड़ों छात्र और युवा मौजूद थे।

Posted By: Jagran

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