'15 साल के बच्चे पानी पिलाने के लिए नहीं होते', वैभव सूर्यवंशी को लेकर गौतम गंभीर पर बरसे कोच
वैभव सूर्यवंशी के कोच मनीष ओझा ने भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने ...और पढ़ें

वैभव सूर्यवंशी को मौका नहीं दिए जाने पर भड़के कोच।
HighLights
कोच मनीष ओझा ने गंभीर पर तानाशाही रवैये का आरोप।
वैभव सूर्यवंशी को लगातार बेंच पर बैठाने पर जताई नाराजगी।
युवा खिलाड़ियों को मौका देने की नीति पर गंभीर से सवाल।
जागरण संवाददाता, पटना। भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर पर वैभव सूर्यवंशी के प्रारंभिक कोच मनीष ओझा ने गंभीर आरोप लगाए हैं।
मनीष ने टीम प्रबंधन और विशेष रूप से गौतम गंभीर की कार्यशैली पर प्रश्न उठाते हुए उनके रवैये को तानाशाही करार दिया।
उन्होंने कहा कि आईपीएल में शानदार प्रदर्शन कर टीम इंडिया के दरवाजे पहुंचे 15 वर्षीय वैभव को लगातार बेंच पर बैठा कोच द्वारा मनोबल गिराया जा रहा है।
नई पीढ़ी को तैयार करने का सही समय आखिर कब आएगा?
दैनिक जागरण से मंगलवार को बातचीत में मनीष ने कहा कि वैभव का हालिया प्रदर्शन ऐसा तो नहीं था उन्हें वेस्टइंडीज सीरीज के अबतक एक भी मैच में जगह नहीं दी गई।
मैं ये नहीं कहता कि उसे सारे मुकाबले खिलाए जाएं, पर एक-दो मैचों में तो स्थान दिया जाना चाहिए। गंभीर की 'सही समय का इंतजार करने' की नीति पर सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि जब रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे दिग्गज खिलाड़ी ढलती उम्र के पड़ाव पर हैं, तो नई पीढ़ी को तैयार करने का सही समय आखिर कब आएगा?
उन्होंने कहा कि 14-15 साल के बच्चे टीम में पानी पिलाने या बेंच गर्म करने के लिए तैयार नहीं किए जाते। यदि ऐसे होनहार क्रिकेटरों को खेलने का अवसर नहीं मिलेगा, तो वे स्वाभाविक रूप से हतोत्साहित होंगे।
वैभव की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए ओझा ने कहा कि आइपीएल में शानदार प्रदर्शन और जिम्बाब्वे दौरे पर मैन आफ द सीरीज का खिताब जीतने के बावजूद उन्हें खेलने का मौका नहीं दिया जा रहा है।

(कोच मनीष ओझा के साथ वैभव सूर्यवंशी। सौ-कोच
गंभीर और लक्ष्मण की कोचिंग में अंतर
मनीष ने वीवीएस लक्ष्मण और गौतम गंभीर की कोचिंग में अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि जब लक्ष्मण कोच होते हैं, तो टीम में युवाओं के लिए जगह खुद-ब-खुद बन जाती है, लेकिन गंभीर के आते ही वह जगह गायब हो जाती है।
उन्होंने संजू सैमसन, शिवम दुबे, और तिलक वर्मा जैसे खिलाड़ियों के स्ट्राइक रेट और प्रदर्शन के उतार-चढ़ाव का भी उदाहरण दिया।
रांची को अपना घरेलू मैदान बताते हुए ओझा ने कहा कि वे खुद वैभव को खेलते हुए देखने वहां गए थे, लेकिन जब वैभव को अंतिम एकादश में नहीं चुना गया, तो उन्हें भारी निराशा हुई। इसी हताशा के कारण मैच के बाद वे वैभव से केवल एक संक्षिप्त मुलाकात करके वापस लौट आए।
