पटना [जेएनएन]। जनता दल यूनाइटेड (JDU) सुप्रीमो नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार में सांकेतिक भागीदारी मंजूर करने से इनकार करते हुए कहा कि अगर भारतीय जनता पार्टी (BJP) सीटों के अनुपात में मंत्रिमंडल में जगह देने का प्रस्‍ताव देती तो वे इसे स्‍वीकार कर लेते।
जेडीयू मंत्रिमंडल से बाहर, लेकिन एनडीए में रहकर सरकार को समर्थन देती रहेगी। मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने ये बातें शुक्रवार को दिल्‍ली से पटना लौटकर कहीं। उनहोंने यह भी साफ कर दिया कि जदयू अब कभी मोदी कैबिनेट में शामिल नहीं होगा।

अटलजी की सरकार की दिलाई याद
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को पटना में इस बात को दो टूक तरीके से उठाया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में घटक दलों का आनुपातिक प्रतिनिधित्व होना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि बिहार में हमलोग घटक दलों को आनुपातिक ढंग से ही मंत्रिमंडल में शामिल करते हैं। अटलजी की सरकार में भी यही व्यवस्था लागू थी। उस समय भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं था, पर अभी बात अलग है। अभी भाजपा खुद पूर्ण बहुमत में है। अपनी पार्टी की कोर टीम के साथ विमर्श कर वह इस नतीजे पर आए कि मंत्रिमंडल में सांकेतिक रूप से भागीदारी में जदयू की कोई रुचि नहीं।

भविष्‍य में भी केंद्रीय कैबिनेट में जदयू नहीं होगा शामिल
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट कहा कि जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में वह यह कह रहे हैं कि भविष्य में केंद्रीय कैबिनेट में जदयू के शामिल होने का कोई प्रश्न नहीं है। गठबंधन में आरंभ में जो बातें होती हैैं, वही आखिरी होती है। मंत्रिपरिषद में आनुपातिक या सांकेतिक रूप से घटक दलों की भागीदारी का निर्णय भाजपा को करना था। 

कॉमन मिनिमम प्रोग्राम पर सरकार को तय करना है 
हवाई अड्डा परिसर में संवाददाताओं से बातचीत के क्रम में मुख्यमंत्री ने कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के संबंध में पूछे गए एक प्रश्न पर कहा कि यह तो सरकार को तय करना है कि आगे वह किस प्रकार से काम करना चाहेंगे। उन्होंने कहा कि किसी को इस बात पर भ्रम नहीं होना चाहिए कि सरकार में शामिल होना ही साथ रहने का प्रमाण है। बिहार में जो चुनावी कैंपेन किया गया, उसमें सभी लोगों ने एक दूसरे का साथ दिया।

नीतीश की अमित शाह से भी हुई थी बात
मुख्यमंत्री ने कहा कि वह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह (Amit Shah) के बुलावे पर 29 मई को दिल्ली गए थे। मंत्रिपरिषद के गठन को ले हुए विमर्श में हमें यह बताया गया कि भाजपा सांकेतिक रूप से अपने घटक दलों को एक-एक सीट पर प्रतिनिधित्व देना चाहती है। हमारे दल का लोकसभा में 16 और राज्यसभा में छह सीटें हैैं। वैसे भी मंत्रिमंडल में शामिल होने का हमलोगों ने कोई प्रस्ताव नहीं दिया था। मंत्रिमंडल में सांकेतिक रूप से शामिल होने के मसले पर पार्टी की कोर टीम में शामिल नेताओं ने कहा कि इसकी कोई जरूरत नहीं। 

हिस्‍सेदारी भाजपा का अंदरूनी मामला 
केंद्रीय कैबिनेट में बिहार की हिस्सेदारी के संदर्भ में सामाजिक समीकरण में को केंद्र में रख पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भाजपा का अंदरूनी मामला है। भाजपा की हारी हुई आठ सीटों पर जदयू ने जीत हासिल की। केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं के बारे में उन्होंने कहा कि वह तो आरंभ से यह कहते रहे हैैं कि पिछड़े राज्यों के पिछड़ेपन को खत्म करने व महिला सशक्तिकरण की दिशा में विशेष पहल की जानी चाहिए। बिहार को विशेष राज्य का दर्जा, धारा-370 जैसे मुद्दे पर उनके दल की राय पहले से सार्वजनिक है।

सांकेतिक प्रतिनिधित्‍व की जरूरत नहीं
नीतीश कुमार ने कहा कि बीजेपी को पूर्ण बहुमत मिला है। अमित शाह की बात से लगा कि वे घटक दलों को सांकेतिक प्रतिनिधित्‍व देना चाहते थे। उनकी बात सुनी, फिर कहा कि इसकी (सांकेतिक प्रतिनिधित्‍व) जरूरत नहीं है। फिर भी पार्टी में बात कर अंतिम फैसला करेंगे।

आनुपातिक होनी चाहिए भागीदारी
नीतीश कुमार ने बताया कि इसके बाद उन्‍होंने पार्टी में एक-एककर सबों से बात की। सबकी राय यही थी कि सांकेतिक प्रतिनिधित्‍व उचित नहीं, भागीदारी तो आनुपातिक होनी चाहिए। इसके बाद पार्टी ने केंद्र सरकार में शामिल नहीं होने का फैसला किया। नीतीश कुमार ने कहा कि इसके बावजूद जेडीयू गठबंधन (एनडीए) का हिस्‍सा बना रहेगा। उन्‍होंने मोदी सरकार (PM Modi Government) से किसी तरह की नाराजगी से इनकर किया।

बिहार में जेडीयू के 16 सांसद
नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार में जेडीयू के 16 सांसद हैं। इनमें कई ऐसी सीटें हैं, जहां गत चुनाव में एनडीए की हार हुई थी। यह जनता की जीत है। उन्‍होंने कहा कि सिर्फ किशनगंज सीट पर जदयू की हार हुई। लेकिन इसका एनालासिस कर लिया जाए कि हार के क्‍या कारण हैं।   

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Posted By: Amit Alok

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