चन्द्रशेखर, पटना। बिहार के पोस्ट मास्टर जनरल देसी गायों के इतने शौकीन हैं कि उन्होंने गोशाला खड़ी कर ली है। इतने महत्वपूर्ण पद पर रहते हुए अनिल कुमार ने देसी गायों को संरक्षण देने के साथ गौपालन का बीड़ा उठाया है। उनकी गोशाला में 20 देसी गायें हैं। सबसे पहले विलुप्त हो रही पटनिया नस्ल की दो गायों को पाला और अब देश के कोने-कोने से देसी गाय खरीद रहे हैं।

राजधानी से सटे नौबतपुर प्रखंड के चिरौरा गांव में उन्होंने किसानों से लीज पर जमीन लेकर गोशाला बनाई है। गोशाला में गंगातिरी, बछौत, पहाड़ी, शाहीवाल, फ्रीजवाल, गिर व राखी नस्ल की गायें हैं। वे बताते हैं कि देसी गाय पालने में मेहनत न के बराबर है। दूध भले कम देती हैं, पर यह अमृत होता है। वे मुख्य रूप से दूध रोगियों को देते हैं।

आधुनिक तकनीक से सुसज्जित गोशाला

मूल रूप से नवादा जिले के रहने वाले अनिल कहते हैं, गोशाला का आधुनिक तरीके निर्माण कराया है। गाय बांधने वाली जगह न चिकनी है और न ही रूखी। साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। गायों को मैट पर रखा जाता है। गौमूत्र जमा करने के लिए बाल्टी रखी गई है। बाल्टी इस तरीके से रखी गई है कि मूत्र सीधे बाल्टी में ही गिरता है। नहलाने के लिए झरना : गायों को नहलाने के लिए झरना बनाया है। खाने व पानी पीने के लिए टब लगाए गए हैं। गोशाला में कहीं भी न गंदगी देखने को मिलती है और न ही मक्खी या मच्छर। वे खुद अवकाश के दिनों में गौशाला जाते हैं और गायों की सेवा करते हैं।

गौपालकों को दी टिप्स

खरीदारी से पहले जानिए इतिहास अनिल कुमार कहते हैं कि देसी गाय को खरीदने के पहले उसके माता-पिता की जानकारी लेनी चाहिए। उन्होंने हरियाणा से शाहीवाल नस्ल की गाय खरीदी है। उसकी बाछी विशुद्ध करीम वंश से है। वह 12 लीटर दूध दे रही है। शीघ्र ही 15 लीटर से अधिक दूध देने लगेगी। इन्हें खाने में गेहूं व धान के भूसे के साथ ही सरसों-तीसी की खल्ली समेत नौ तरह का अनाज दिया जाना चाहिए। हरे चारे के लिए जनौरा, नेपियर आदि घास उपजानी चाहिए।

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