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आरक्षण पर आमने-सामने चिराग-मांझी, बोले- क्रीमी लेयर चाहिए तो कुर्सी छोड़ें; संतोष सुमन से मांगा इस्तीफा

Published: Sat, 29 Aug 2026 03:18 PM (IST)

बिहार में SC-ST आरक्षण पर NDA के भीतर चिराग पासवान और जीतन राम मांझी आमने-सामने आ गए हैं। चिराग ने ...और पढ़ें

जीतन राम मांझी और चिराग पासवान

जीतन राम मांझी और चिराग पासवान

HighLights

  1. चिराग पासवान ने SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर का विरोध किया।

  2. जीतन राम मांझी वंचितों के लिए आरक्षण में वर्गीकरण चाहते हैं।

  3. NDA में आरक्षण नीति पर मतभेद से दलित राजनीति गरमाई।

डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार की सियासत में SC-ST आरक्षण को लेकर NDA के भीतर मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने जीतन राम मांझी और उनके बेटे संतोष सुमन के आरक्षण में बदलाव से जुड़े रुख पर कड़ा ऐतराज जताया है।

चिराग ने साफ कहा कि अगर क्रीमी लेयर की व्यवस्था लागू करने की मांग है तो पहले पद से इस्तीफा देना चाहिए।

क्रीमी लेयर के मुद्दे पर आमने-सामने आए NDA के नेता

चिराग पासवान ने कहा कि SC-ST आरक्षण का आधार आर्थिक स्थिति नहीं, बल्कि सदियों से चला आ रहा सामाजिक भेदभाव है।

ऐसे में आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव को लेकर कोई भी फैसला बेहद गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि क्रीमी लेयर जैसे मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी के बजाय संसद में चर्चा होनी चाहिए।

चिराग ने जीतन राम मांझी के साथ-साथ बिहार सरकार में मंत्री संतोष सुमन के रुख पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर दोनों नेता आरक्षण में क्रीमी लेयर या अन्य बदलाव चाहते हैं तो उन्हें पहले अपने पदों से इस्तीफा देना चाहिए।

मांझी खेमे की दलील- सबसे वंचितों तक पहुंचे आरक्षण का लाभ

दरअसल, जीतन राम मांझी और संतोष सुमन SC-ST आरक्षण के भीतर वर्गीकरण और कोटे में कोटा जैसे मुद्दों की वकालत करते रहे हैं। उनका तर्क है कि आरक्षण का लाभ सभी समुदायों तक समान रूप से नहीं पहुंच पा रहा है।

संतोष सुमन का कहना है कि उनकी मांग आरक्षण खत्म करने की नहीं, बल्कि उन समुदायों तक उसका लाभ पहुंचाने की है जो अब भी सबसे ज्यादा वंचित हैं।

उनका सवाल है कि अगर अन्य वर्गों में अलग-अलग श्रेणियां बनाई जा सकती हैं तो SC वर्ग के भीतर भी जरूरत के आधार पर व्यवस्था क्यों नहीं हो सकती।

चिराग बोले- आरक्षण की मूल भावना को समझना जरूरी

चिराग पासवान का कहना है कि आरक्षण की व्यवस्था आर्थिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए नहीं बनाई गई थी। इसका मूल उद्देश्य सामाजिक भेदभाव और छुआछूत का सामना करने वाले समुदायों को प्रतिनिधित्व और समान अवसर उपलब्ध कराना था।

उनके मुताबिक आरक्षण को केवल आर्थिक स्थिति के आधार पर देखने से इसकी मूल भावना प्रभावित हो सकती है। चिराग ने संकेत दिया कि इस तरह के संवेदनशील मुद्दे पर किसी भी बदलाव से पहले व्यापक संवैधानिक और संसदीय बहस जरूरी है।

राहुल गांधी पर भी साधा निशाना

आरक्षण के मुद्दे पर चिराग पासवान ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी हमला बोला। उन्होंने सामाजिक भेदभाव के लिए कांग्रेस की लंबे समय तक रही सत्ता की भूमिका पर सवाल उठाया।

चिराग ने कहा कि अगर आज भी समाज में भेदभाव की स्थिति बनी हुई है तो लंबे समय तक देश पर शासन करने वाली कांग्रेस को भी इसका जवाब देना चाहिए।

इस बयान के जरिए उन्होंने आरक्षण की बहस को NDA के भीतर के मतभेदों से आगे बढ़ाकर विपक्ष पर भी निशाना साधने की कोशिश की।

दलित राजनीति में बढ़ सकता है टकराव

आरक्षण के मुद्दे पर चिराग पासवान और मांझी-सुमन खेमे के बीच सामने आया मतभेद बिहार की दलित राजनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।

दोनों पक्ष खुद को वंचित वर्गों के हितों की आवाज बता रहे हैं, लेकिन आरक्षण की व्यवस्था को लेकर उनके रास्ते अलग नजर आ रहे हैं।

ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या NDA के भीतर इस मुद्दे पर कोई साझा रुख बन पाएगा या आने वाले दिनों में आरक्षण को लेकर सहयोगी दलों के बीच टकराव और बढ़ेगा।