पटना में छठ पूजा की तैयारियों पर चक्रवात 'अर्णब' का साया, बारिश से घाटों पर दलदल का खतरा बढ़ा
पटना में छठ पूजा की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं, लेकिन चक्रवात 'अर्णब' के कारण हुई बारिश से घाटों ...और पढ़ें

बारिश से घाटों पर दलदल का खतरा बढ़ा
HighLights
पटना में छठ पूजा की तैयारियां जोरों पर।
चक्रवात अर्णब की बारिश से घाटों पर दलदल का खतरा।
समय पर काम पूरा करना निगम के लिए बड़ी चुनौती।
जागरण संवाददाता, पटना। लोक आस्था के महापर्व छठ के पहले अर्घ्य में अब महज 16 दिन शेष हैं। ऐसे में गंगा घाटों से लेकर तालाबों और पार्कों तक तैयारियां तेज हो गई हैं। कहीं मशीनों से घाटों को समतल किया जा रहा है तो कहीं सीढ़ियों पर जमी गाद हटाई जा रही है।
बालू बिछाने, बैरिकेडिंग, रोशनी और पहुंच पथ बनाने का काम भी जारी है। इस बीच चक्रवात अर्णब के प्रभाव से हुई वर्षा ने तैयारियों पर पानी फेरने की आशंका बढ़ा दी है। यदि लगातार वर्षा हुई और गंगा का जलस्तर बढ़ा तो घाटों पर फिर दलदल और कीचड़ की समस्या खड़ी हो सकती है। इससे छठ घाटों को तैयार करने में देरी होने की आशंका है।
12 से 13 नवंबर तक काम पूरा करने का लक्ष्य
नगर निगम ने छठ घाटों की तैयारी के लिए 19.34 करोड़ रुपये का खाका तैयार किया है। सभी काम 12 से 13 नवंबर तक पूरे करने का लक्ष्य है। हालांकि, इस वर्ष बाढ़ के कारण घाटों पर पिछले साल की तुलना में अधिक गाद जमा हुई है।
कई कच्चे घाटों और उनके पहुंच पथ पर कीचड़ है। कुछ पक्के घाटों की सीढ़ियां अब भी पानी में डूबी हैं। ऐसे में वर्षा होने पर सफाई और समतलीकरण का काम दोबारा करना पड़ सकता है।
कई घाटों पर मशीनों से हो रहा समतलीकरण
गंगा का पानी उतरने के साथ ही घाटों को तैयार करने का काम तेज किया गया है। एलसीटी, बांस और कलेक्ट्रेट घाट पर मशीनों से जमीन समतल की जा रही है। काली और कदम घाट की सीढ़ियों पर जमी गाद हटाई जा रही है।
तेज धूप में पानी से बाहर निकली बालू और मिट्टी सूखने लगी थी, लेकिन वर्षा होने पर इनके फिर गीले होने का खतरा बढ़ गया है। इससे श्रद्धालुओं के आने-जाने के लिए सुरक्षित रास्ता बनाने में परेशानी हो सकती है।
कलेक्ट्रेट और महेंद्रू घाट के पहुंच पथ पर दलदल
कलेक्ट्रेट और महेंद्रू घाट पर गंगा का पानी घाट से काफी दूर है। ऐसे में श्रद्धालुओं को नदी तक पहुंचने के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ सकता है। दोनों घाटों के पहुंच पथ पर दलदल की समस्या है। अन्य कच्चे घाटों पर भी कई जगह पानी और कीचड़ जमा है।
नगर निगम की ओर से ऐसे स्थानों पर पानी निकालने के लिए पंप लगाए जा रहे हैं। पोकलेन मशीनों से गड्ढों को भरा जा रहा है और घाटों को समतल किया जा रहा है। वहीं, पक्के घाटों की सीढ़ियों पर जमी गाद की सफाई कर्मचारियों से कराई जा रही है।
प्रति वार्ड 10 अतिरिक्त कर्मी तैनात
घाटों की सफाई के लिए नगर निगम ने प्रत्येक वार्ड में 10 अतिरिक्त कर्मियों की तैनाती की है। जिन घाटों की सीढ़ियां, पोर्टिको, पैदल रास्ते और रेलिंग क्षतिग्रस्त हैं, उनकी मरम्मत भी कराई जा रही है।
निगम को उम्मीद है कि नवंबर के मध्य तक गंगा का जलस्तर और कम होगा। हालांकि, जिन घाटों पर पानी या दलदल की समस्या बनी रहेगी, वहां पहुंच पथ को दुरुस्त करने सहित वैकल्पिक व्यवस्था की तैयारी भी की जा रही है, ताकि व्रतियों और श्रद्धालुओं को अर्घ्य देने में परेशानी नहीं हो।
समय पर काम पूरा करना होगी चुनौती
इस बार छठ महापर्व 13 से 16 नवंबर तक मनाया जाएगा। 15 नवंबर को अस्ताचलगामी और 16 नवंबर को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। दोनों दिन गंगा घाटों पर बड़ी संख्या में व्रती और श्रद्धालु पहुंचेंगे।
ऐसे में घाटों तक पहुंचने के रास्ते, पार्किंग, रोशनी और सुरक्षित अर्घ्य स्थल तैयार करना निगम की प्राथमिकता है। 12 से 13 नवंबर तक काम पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित होने के कारण मौसम की हर गतिविधि महत्वपूर्ण हो गई है।
