जमुई [जेेएनएन]। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला द्वारा एक जनसभा में कश्मीर को लेकर दिए बयान और इसके अलावा फिल्म अभिनेता ऋषि कपूर के ट्वीट से कश्मीर के बारे में की गई टिप्पणी से आहत जमुई व्यवहार न्यायालय के अधिवक्ताओं ने दोनों के खिलाफ परिवाद पत्र दायर किया है।

पूर्व मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला के अलावा फिल्म अभिनेता ऋषि कपूर को नामजद करते हुए अधिवक्ता परिमल कुमार द्वारा दायर परिवाद पत्र में परिवादी अधिवक्ता राजीव रंजन ने कहा है कि जब उन्होंने अन्य अधिवक्ताओं के साथ केश के संदर्भ में चर्चा करते हुए टीवी खोला तो समाचार में उन्होंने देखा कि फारूख अब्दुल्ला एक जनसभा को संबोधित करते हुए कह रहे हैं कि कश्मीर भारत के बाप की जागीर नहीं है। यह कभी भी भारत का नहीं हो सकता।

फारूख अब्दुल्ला के इस बयान को फिल्म अभिनेता ऋषि कपूर ने अपने ट्वीटर हैंडल से समर्थन कर भारत की एकता और अखंडता को विद्वेषपूर्ण मानसिकता से अस्थिर करने एवं भारतीय सेना के मनोबल को तोडऩे के उद्देश्य से षडय़ंत्र रचकर प्रचारित-प्रसारित किया है।

उन्होंने अपने आवेदन में कहा है कि फारूख अब्दुल्ला का यह बयान तथा ऋषि कपूर द्वारा किया गया कृत्य विधि द्वारा स्थापित भारत सरकार के प्रति घृणा पैदा करने के साथ-साथ राष्ट्रीय अखंडता को प्रभावित करने का कुत्सित प्रयास है।

परिवादी राजीव रंजन के इस परिवाद पत्र का अन्य अधिवक्ता चंद्रशेखर प्रसाद सिंह, राजीव कुमार, महेन्द्र नारायण, विजय कुमार तथा विपिन बिहारी मिश्रा ने गवाह के रूप में समर्थन किया।

इस परिवाद पत्र को सीजेएम शशिभूषण मणि त्रिपाठी ने जांच के लिए सूचीबद्ध करते हुए न्यायिक दंडाधिकारी मनीष कुमार पांडेय की अदालत में भेज दिया है।

Posted By: Kajal Kumari

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