पटना। कोरोना के खौफ ने मास्क का धंधा चमका दिया है। शुरुआत में मास्क की कमी हुई तो राजधानी की थोक दवा मंडी गोविंद मित्रा रोड में एक रुपये प्रति पीस बिकने वाला थ्री प्लाई मास्क 12 रुपये तक बिका। मांग बढ़ती देख नन-वोवेन कपड़े से कैरी बैग बनाने वालों ने मोर्चा संभाला और इसी से थ्री प्लाई मास्क बनाने लगे। हालांकि, ये थ्री प्लाई मास्क कोरोना वायरस के संक्रमण से सुरक्षा देने की बजाय सुरक्षित होने का अहसास भर करा रहे हैं। ये कोरोना वायरस के संक्रमण से तो नहीं बचाते लेकिन जितने कपड़े में व्यवसायी एक कैरी बैग बनाकर एक रुपये में बेचते थे, उतने में चार मास्क बनाकर चौगुनी कमाई कर रहे हैं। आपूर्ति बढ़ने पर फिलहाल यह मास्क दो रुपये प्रति पीस तक मिल रहा। : जानकारी नहीं होने से ठगे गए लोग :

थ्री प्लाई मास्क नन-वोवेन पॉली प्रोपलीन से बनता है। थ्री प्लाई का मतलब तीन सतह से है। इसमें सबसे बाहरी सतह हाइड्रोफोबिक यानी वॉटर प्रूफ होती है। बीच की सतह मेल्ट ब्लॉन फिल्टर सतह और तीसरी सतह मुंह-नाक से निकलने वाले एयर पार्टिकुलेट को सोखने के काम आती है। इसे काटने पर सबसे ऊपर एक पारदर्शी सतह, बीच में सफेद और तीसरी सतह नीली, हरी या सफेद साफ देखी जा सकती है। : प्रदेश में थ्री प्लाई मास्क का नहीं होता निर्माण :

नन वोवेन और मेल्ट ब्लॉन कपड़े की उपलब्धता नहीं होने से प्रदेश में थ्री प्लाई मास्क का निर्माण नहीं किया जाता है। अभी तक प्रदेश में सिर्फ दो कंपनियों ने ही थ्री प्लाई और एन-95 मास्क बनाने का लाइसेंस लिया है। वहीं मानक को ताक पर रखकर धड़ल्ले से कल तक एक रुपये में किराना सामान के लिए कैरीबैग बनाने वाले मास्क के नाम पर आज हर माह लाखों कमा रहे हैं। लापरवाही यह कि किसी के पास बनने के बाद मास्क को विसंक्रमित करने की मशीन नहीं है। साथ ही बनाने वाले कारीगर भी मास्क व ग्लव्स नहीं पहनते हैं।

: वेलसन के थ्री लेयर मास्क की कीमत 16 रुपये :

गोविंद मित्रा रोड के थोक दवा विक्रेता मिंकू कुमार ने बताया कि गुणवत्तापूर्ण थ्री प्लाई मास्क प्रदेश में बाहर से आता था। पूर्व में टू प्लाई एक और थ्री प्लाई मास्क दो रुपये में बिकता था। वहीं तौलिया बनाने वाली वेलस्पन कंपनी उस समय थ्री प्लाई मास्क 16 रुपये पीस बेच रही थी। आजकल टाटा ने गुणवत्तापूर्ण एन-95 मास्क 150 रुपये में उतार दिए हैं।

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: वैज्ञानिकों ने भी माना घरेलू मास्क सबसे बेहतर : अमेरिकन केमिकल सोसायटी के वैज्ञानिकों के अनुसार कॉटन, प्राकृतिक रेशम या शिफॉन की तीन-चार परत वाले मास्क छींकने-खांसने के दौरान ताकत के साथ निकले वायरस से बचाव कर सकते हैं। वहीं गुणवत्तापूर्ण थ्री प्लाई मास्क में 25 प्रतिशत तक संक्रमण की आशंका रहती है।

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ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट में मास्क शामिल नहीं होने से यह मामला कोर्ट में टिकता नहीं है। ऐसे में अमानक मास्क पर औषधि विभाग कार्रवाई नहीं कर सकता है।

- विश्वजीत दास गुप्ता, सहायक औषधि नियंत्रक पटना

Posted By: Jagran

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