पटना। हर व्यक्ति को ध्यान में रखते हुए बजट बनना चाहिए। खर्च बढ़े तो इनकम भी बढ़ना चाहिए। इसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, नौकरी और बैंकिंग सेक्टर में सुधार के अलावे कई चीजों पर ध्यान देने की जरूरत है। जो कृषि को व्यवसाय के रूप में बड़े पैमाने पर अपनाकर पैसा कमा रहे हैं उनसे भी टैक्स लेने का स्लैब बने, क्योंकि 70 फीसद आबादी जो कृषि करती है वो सीधे तौर पर टैक्स से मुक्त है। बजट ऐसा हो, जिसमें एक आम आदमी की न्यूनतम आय उसकी मौलिक जरूरतें पूरी करने लायक हों। उक्त बातें दैनिक जागरण कार्यालय में आयोजित बजट परिचर्चा में हिस्सा ले रहे लोगों ने कहीं। सरकार का बजट खर्च को बढ़ावा देने वाला होना चाहिए। रोजगार उत्पन्न करने वाले प्रोजेक्ट आने चाहिए। 80 वर्ष के ऊपर के लोगों को पेंशन पर लगने वाले टैक्स से मुक्त कर देना चाहिए।

श्याम जी सहाय, अध्यक्ष, बागबान क्लब बजट इस तरह से बने कि खर्च बढ़े तो इनकम भी बढ़े। हमें चिकित्सा सस्ती चाहिए। आज के अस्पताल महंगे होटल बन गये हैं, जहां इलाज कराने के लिए मोटी रकम खर्च करने पड़ती है।

अंशु अवस्थी, फ्रेजर रोड सरकार को नौकरी उत्पन्न करने पर काम करना चाहिए। इंफ्रास्ट्रक्चर को गांव की ओर ले जाने की जरूरत है। कार के लिए लोन मिल जाता है, लेकिन इलाज के लिए लोन नहीं मिल पाता है।

संजय अवस्थी, फ्रेजर रोड गुणवत्तापूर्ण शिक्षा आम लोगों की पहुंच से दूर होती जा रही है। इसका सबसे बड़ा कारण शिक्षा का महंगा होना है। शिक्षा सस्ती और सुलभ होनी चाहिए। जिनके पास मोटी रकम है, उन्हें अच्छी शिक्षा मिल रही है।

डॉ. रामनारायण सिंह, कंकड़बाग बजट में संशोधन होना चाहिए। कृषि पर भी टैक्स लगने चाहिए। कृषि को जो बड़े व्यवसाय के रूप में कर रहे है, उनसे टैक्स लेना चाहिए। सरकार लिए गए टैक्स को किसी ना किसी रूप में हम तक पहुंचाए।

जनमेजय सिंह, नंदनपुरी सभी नागरिकों को एक समान रूप में देखते हुए बजट बनाया जाना चाहिए। वरीय नागरिकों की देखभाल के लिए सरकार को कुछ कदम उठाने चाहिए। बैंकिंग सेक्टर में सुधार होना चाहिए।

दिगंबर प्रसाद अग्रवाल, नंदनपुरी

Posted By: Jagran

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