पटना, जागरण संवाददाता। बच्चे के जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान कराना नवजात की मृत्युदर को 20 फीसद तक कम करती है। इसके अतिरिक्त 6 माह तक सिर्फ स्तनपान करने वाले शिशुओं में डायरिया से 11 फीसद एवं निमोनिया से 15 फीसद तक मृत्यु दर कम होती है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के शिशु विभागाध्यक्ष डा. लोकेश तिवारी ने बताया कि नवजात को जन्म से छह माह तक केवल स्तनपान कराना चाहिए एवं 6 माह के बाद शिशु को संपूरक आहार देना शुरू कर देना चाहिए। साथ ही शिशु के बेहतर विकास के लिए उसे कम से कम 2 साल तक स्तनपान कराना चाहिए। इससे बच्चे के शारीरिक के साथ उसका बेहतर मानसिक विकास भी होता है।

16 फीसद बच्चों को ही मिलता है पर्याप्त आहार

पीएमसीएच के पूर्व शिशु विभागाध्यक्ष प्रो. निगम प्रकाश नारायण ने कहा कि 50 फीसद से कम नवजात को ही जन्म के दो घंटे के भीतर मां का दूध नसीब होता है। उन्होंने कहा कि रूढि़वादी महिलाएं व कई पुरानी महिला डाक्टर भी जन्म के एक घंटे के भीतर मां का गाढ़ा पीला दूध नवजात को नहीं पीने देती है। इसका बच्चों पर नकारात्मक असर पड़ता है।

40 फीसद तक बच्‍चों को नहीं मिल पाता पर्याप्‍त दूध

60 फीसद बच्चों को ही जन्म से छह महीने तक केवल मां का दूध नसीब होता है। जबकि, छह-आठ महीने में बच्चों को समुचित मात्रा में अनुपूरक आहार देना चाहिए। डा. नारायण ने कहा कि जन्म से दो वर्ष तक केवल 16 फीसद बच्चों को ही पर्याप्त  आहार मिल रहा है। पर्याप्त आहार नहीं मिलने के कारण बच्चे कुपोषित होते है। इससे हाइट व वेट कम होता है।

  • जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपान से 20 फीसद नवजात की बचती है ङ्क्षजदगी
  • जन्म से छह माह तक स्तनपान से कई बीमारियों का खतरा हो जाता है कम
  • डायरिया व निमोनिया से होने वाली मौत में आती है 11 फीसद व 15 फीसद की कमी
  • 60 फीसद बच्चों को ही मिल रहा जन्म से छह माह तक केवल मां का दूध