पटना, रमण शुक्ला। सूर्यदेव के उत्तरायण होते ही भाजपा के नेताओं-कार्यकर्ताओं की बेचैनी बढ़ गई है। पार्टी के धुरंधर संगठन में ओहदा पाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिए हैं। किसी को बूथ कार्यकारिणी में जगह चाहिए तो कोई मंडल, जिला और प्रदेश संगठन में जगह बनाने के लिए पार्टी के रसूखदारों की परिक्रमा में जुटा हैं।  पार्टी ने खरमास के कारण संगठन पदाधिकारियों के मनोनयन का काम टाल दिया था। 

बता दें कि भाजपा के फ्रंटल संगठनों में भाजयुमो, पिछड़ा वर्ग मोर्चा, अनुसूचित जाति मोर्चा से लेकर विभाग, प्रकल्प और प्रकोष्ठ के संयोजकों की अहम भूमिका रहती है। पार्टी संगठनात्मक गतिविधियों को जनता के बीच पहुंचाने में मोर्चा, प्रकल्प, विभाग और प्रकोष्ठ से लेकर आनुषांगिक संगठन बेहद कारगर साबित होते हैं। यही वजह है कि पार्टी कार्यकर्ताओं में मुख्य संगठन से लेकर अनुषांगिक संगठनों की नुमाइंदगी हासिल करने की होड़ मची रहती है।

19 विभाग, नौ प्रकल्प और 17 प्रकोष्ठ हैं वर्तमान में

वर्तमान में पार्टी फ्रंटल संगठनों के अलावा 19 विभाग, नौ प्रकल्प और 17 प्रकोष्ठ हैं। पार्टी इन संगठनों के जरिए वरिष्ठ नेताओं को सक्रिय रखने का प्रयास करती है। इसके अलावा पार्टी प्रदेश और राष्ट्रीय परिषद में पूर्व पदाधिकारी, मंत्री, पूर्व विधायक, पूर्व सांसद और पूर्व विधान पार्षदों के अलावा संगठन पूर्व पदधारकों को समायोजित करती हैं।

रणनीतिकारों की बढ़ी मशक्कत

चुनावी वर्ष होने की वजह से पार्टी के रणनीतिकारों की मशक्कत बढ़ गई हैं। प्रदेश और देश में पार्टी की सरकार होने से कार्यकर्ताओं की अपेक्षाएं बढ़ी हैं। हर दूसरा कार्यकर्ता संगठन में पदधारक बनने के लिए तिकड़म लगा रहा हैं। भाजपा के बूथ स्तरीय कार्यकारिणी में 19 पदाधिकारी के पद हैं। जबकि मंडल में 61 पदाधिकारी के पद हैं। जिले में 91 सदस्यीय कार्यकारिणी हैं। वहीं, प्रदेश संगठन में 105 पदाधिकारियों के पद हैं।

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