पटना [सुभाष पांडेय]। बिहार की आठ सीटों के लिए शुक्रवार को चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद एनडीए की झोली में इन सभी सीटों को डालने के लिए भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी है। 2014 के लोकसभा चुनाव में भी एनडीए ने इसमें से सात सीटों पर कब्जा जमाया था। पांच सीट भाजपा ने और दो रालोसपा ने जीती थी।

नालंदा की सीट जदयू के खाते में गई थी। हालांकि अब जदयू भी एनडीए का हिस्सा है। एनडीए के लिए सातवें और आखिरी चरण की ये आठ सीटें राजनीतिक दृष्टि से इसलिए भी काफी महत्वूपर्ण है, क्योंकि इसमें नरेंद्र मोदी सरकार के चार मंत्रियों (रविशंकर प्रसाद, आरके सिंह, रामकृपाल यादव और अश्विनी चौबे) का भविष्य भी दांव पर लगा है।

रालोसपा अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा एनडीए छोड़कर महागठबंधन में शामिल हो गए हैं। काराकाट की सीट वह बचा पाते हैं या नहीं, यह इस चुनाव में तय होगा। हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के अध्यक्ष जीतनराम मांझी जहानाबाद, पाटलिपुत्र और काराकाट में अपनी बिरादरी के वोटों को महागठबंधन के पक्ष में कितना ट्रांसफर कराते है, इसकी भी परीक्षा होनी है।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय की मानें तो उनके कार्यकर्ताओं के लिए चुनाव प्रचार अभियान भले ही

समाप्त हो गया है, लेकिन अगले 48 घंटे ज्यादा चुनौती के है। सातवें व अंतिम चरण की सभी सीटों पर एनडीए काफी मजबूत स्थिति में है फिर भी आखिरी वोट पड़ने तक हमने कार्यकर्ताओं को सजग और चौकन्ना रहने को कहा है।

पटना साहिब में अंतिम चरण का सबसे रोचक मुकाबला हो रहा है, जहां भाजपा के रविशंकर प्रसाद और कांग्रेस

के शत्रुघ्न सिन्हा आमने-सामने के मुकाबला में हैं। भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में अमित शाह और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने रोड शो, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मनोज तिवारी, पवन सिंह ने कई सभाएं करके तो कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष राहुल गांधी और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने रोड शो करके चुनाव को दिलचस्प बना दिया है।

पाटलिपुत्र में भी राजद प्रत्याशी के रूप में लालू यादव की बेटी मीसा भारती के मैदान में आ जाने से मुकाबला

दिलचस्प हो गया है। इस सीट के महत्व को इसी से समझा जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 मई को

पालीगंज में और भाजपा अध्यक्ष सात मई को मसौढ़ी में भाजपा प्रत्याशी रामकृपाल यादव के समर्थन में चुनावी रैली करने पहुंचे।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी 16 मई को विक्रम में महागठबंधन प्रत्याशी के पक्ष में चुनावी सभा को

संबोधित किया। आरा में भाजपा प्रत्याशी और केंद्रीय मंत्री आरके सिंह और भाकपा माले के राजू यादव के बीच मुकाबला इसलिए भी दिलचस्प हो गया है, क्योंकि पहली बार कांग्रेस के कार्यकर्ता माले के किसी प्रत्याशी के पक्ष में वोट मांग रहे हैं।

बक्सर में भाजपा प्रत्याशी अश्विनी चौबे का राजद के जगदानंद से मुकाबला है। 2014 में भी दानों आमने-सामने रहे। इस बार मैदान में ददन पहलवान के नहीं होने से मुकाबला रोचक हो गया है। पिछले चुनावों में ददन को मिलने वाले डेढ़ से दो लाख वोट जिस तरफ ट्रांसफर होंगे, जीत उसी की होगी। वैसे ददन पहलवान जदयू के विधायक हैं और एनडीए के लिए वोट मांग रहे हैं। 

 

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Posted By: Kajal Kumari

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