राज्य ब्यूरो, पटना। Bihar News: आपातकाल (Emergency in India) की बरसी पर बिहार में राजनीति‍क माहौल गर्म रहा। भाजपा ने आपातकाल की याद दिलाते हुए कांग्रेस और राजद के गठजोड़ पर निशाना साधा तो राजद ने सरकार को समाजवादी नेता मधु लिमये के बहाने भाजपा-जदयू की सरकार पर निशाना साधा। भाजपा के वरिष्‍ठ नेता और राज्यसभा सदस्य सुशील मोदी ने कहा कि आपातकाल थोपने वालों का साथ देने के लिए बिहार की जनता कभी राजद को माफ नहीं करेगी। दूसरी तरफ, राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट में मधु लिमये के नाम पर बने गेस्ट हाउस को बचाने के लिए राज्य सरकार से गुहार लगाई है।

एक लाख से अधि‍क लोगों को भेजा गया था जेल  

सुशील मोदी ने कहा कि आज से 47 वर्ष पूर्व 25 जून की आधी रात को अपनी सत्ता को बचाने के लिए इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगाया था। उन्होंने कहा कि पूरे देश में उस दिन एक लाख 10 हजार लोगों को जेल में बंद कर दिया गया। प्रेस सेंसरशिप लागू कर दी गई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध लगा दिया गया। आपातकाल के खिलाफ लड़ाई में बिहार की अग्रणी भूमिका थी।

एक करोड़ से अधिक लोगों की नसबंदी का दावा

सुशील मोदी ने कहा क‍ि  जिस कांग्रेस ने संविधान का गला घोंट आपातकाल लगाया, देश की एक सौ से ज्यादा सरकारों को बर्खास्त किया, जो जेपी की मृत्यु के लिए जिम्मेदार है, जिस आपातकाल में एक करोड़ से ज्यादा लोगों की जबरिया नसबंदी कर दी गई, लोकतंत्र की जगह देश में तानाशाही थोप दी, उसी कांग्रेस के साथ राजद ने हाथ मिला लिया।

राजद को कांग्रेस से गठजोड़ के लिए कोसा 

उन्होंने कहा कि आपातकाल ने बता दिया कि जनता को रोटी के साथ आजादी भी चाहिए। देश की जनता कभी भी प्रेस की आजादी पर अंकुश, लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन एवं तानाशाही स्वीकार नहीं कर सकती। राजद तो अब आपातकाल विरोधी दिवस भी मनाना भूल गई। 

मधु लिमये के नाम पर बने भवन को बख्श दे सरकार : शिवानंद

इधर, शिवानंद तिवारी ने कहा कि यह वर्ष समाजवादी नेता मधु लिमये का शताब्दी वर्ष है। यह भी इतिहास बनेगा कि मधु लिमये के शताब्दी वर्ष में समाजवादी सरकार ने अनुग्रह नारायण सिन्हा इंस्टीट्यूट में उनके नाम पर बने गेस्टहाउस को तोड़वा दिया। नीतीश सरकार आधुनिक म्यूजियम बनाने के लिए हड़ताली मोड़ पर सोने के भाव वाली कई एकड़ जमीन का इंतज़ाम कर लेती है। बौद्ध साधना के लिए कई एकड़ में फैले व्यावसायिक भूमि निकाल लेती है, लेकिन समाज में सबसे उपेक्षित आदिवासी समाज की समस्याओं का अध्ययन करने तथा उनका समाधान खोजने के लिए जरूरी संस्थान के लिए भूमि का इंतजाम नहीं कर पा रही है। इसके लिए आधुनिक बिहार के निर्माता कहे जाने वाले अनुग्रह बाबू के नाम पर बना संस्थान ही नजर आ रहा है। इसका उद्घाटन तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने 1958 में किया था। अब इसे तोड़ा जा रहा है। 

Edited By: Shubh Narayan Pathak