विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

बिहार में 13 हजार की रिश्वत का हिसाब 15 साल बाद हुआ, बिहटा के ASI को 3 साल की जेल

Published: Fri, 11 Sep 2026 07:06 PM (IST)

बिहटा थाने के तत्कालीन एएसआई बद्री राम को 13 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ा गया था। निगरानी की ...और पढ़ें

15 साल पुराने मामले में आया फैसला

15 साल पुराने मामले में आया फैसला

HighLights

  1. तत्कालीन एएसआई बद्री राम को 13 हजार रिश्वत लेते पकड़ा गया।

  2. निगरानी अदालत ने 15 साल बाद तीन साल की जेल सुनाई।

  3. दोषी एएसआई पर 26 हजार रुपये का जुर्माना भी लगा।

जागरण संवाददाता, पटना। बिहटा थाने के तत्कालीन एएसआइ बद्री राम को ट्रक छोड़ने के एवज में 13 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा गया था। निगरानी की विशेष अदालत ने अब उसे तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने 26 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

ट्रक छोड़ने के लिए मांगे थे 13 हजार

मामले के अनुसार, सूचक अपना ट्रक रिलीज कराना चाहता था। इसके लिए एमवीआइ जांच कराने का अनुरोध पत्र भेजना जरूरी था। आरोप है कि बद्री राम ने यह पत्र भेजने के बदले 13 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी।

शिकायत के बाद निगरानी ने बिछाया जाल

रिश्वत मांगे जाने की शिकायत निगरानी विभाग तक पहुंची। इसके बाद शिकायत का सत्यापन कराया गया। आरोप सही पाए जाने के बाद निगरानी टीम ने जाल बिछाया और तीन सितंबर 2011 को बद्री राम को 13 हजार रुपये लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया।

15 साल पुराने मामले में आया फैसला

रिश्वत लेते गिरफ्तारी के करीब 15 वर्ष बाद इस मामले में अदालत का फैसला आया है। निगरानी के विशेष न्यायाधीश अतुल कुमार सिंह की अदालत ने शुक्रवार को बद्री राम को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।

26 हजार जुर्माना, नहीं देने पर तीन माह जेल

अदालत ने दोषी एएसआइ पर 26 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की राशि नहीं जमा करने पर उसे तीन महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। मामले में अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने साक्ष्य और गवाह पेश किए।

अभियोजन के 10 गवाहों ने दी गवाही

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 10 गवाहों ने अदालत में गवाही दी। विशेष लोक अभियोजक किशोर कुमार सिंह ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि निगरानी टीम की कार्रवाई के बाद मुकदमा चला और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने बद्री राम को दोषी ठहराया।