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Republic Day 2026: लालकिला में दिखेगी बिहार की 'मखाना' झांकी, दुनिया देखेगी मिथिला की ताकत

Published: Fri, 23 Jan 2026 10:04 AM (IST)

गणतंत्र दिवस समारोह में रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित भारत पर्व में बिहार की मखाना झांकी का चयन हुआ है। 'मखाना: ...और पढ़ें

झांकियों के प्रेस प्रिव्यू के दौरान बिहार प्रदेश की झांकी में दिखेगा मखाना। (जागरण)

झांकियों के प्रेस प्रिव्यू के दौरान बिहार प्रदेश की झांकी में दिखेगा मखाना। (जागरण)

HighLights

  1. बिहार की मखाना झांकी भारत पर्व में चयनित।

  2. थीम: 'मखाना: लोकल से ग्लोबल सुपरफूड'।

  3. मिथिला मखाना को 2022 में मिला जीआई टैग।

राज्य ब्यूरो, पटना। गणतंत्र दिवस समारोह में रक्षा मंत्रालय के स्तर से आयोजित भारत पर्व के अंतर्गत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की चयनित झांकियों में बिहार से मखाना का चयन किया गया है। इसका प्रदर्शन नई दिल्ली के लालकिला में किया जाएगा।

बिहार की झांकी का थीम है-मखाना: लोकल से ग्लोबल तक। भारत पर्व के तहत देश की सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक विविधताओं को झांकियों, हस्तशिल्प, खानपान और परंपराओं के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा।

यह 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना के साथ राज्यों की विशिष्ट पहचान, परंपरागत ज्ञान, आजीविका के स्रोत और आधुनिक विकास की यात्रा को जोड़ने का एक राष्ट्रीय मंच है।

इस वर्ष भारत पर्व में बिहार की झांकी का विषय है- 'मखाना: लोकल से ग्लोबल की थाली में सुपरफूड'। बिहार का सफेद सोना यानी मखाना आज मिथिलांचल के पोखर से निकलकर सुपरफूड पहचान के साथ दुनिया की थाली में परोसा जा रहा है। यह लोकल हुनर का ग्लोबल चेहरा है।

भारत दुनिया की कुल मखाना आपूर्ति का अधिकांश हिस्सा देता है, जिसमें बिहार की हिस्सेदारी लगभग 85–90 प्रतिशत है। मिथिला मखाना को वर्ष 2022 में जीआई टैग भी प्राप्त हुआ है, जिसने इसे वैश्विक बाजार में विशिष्ट पहचान दी है।

झांकी की दृश्य संरचना में दो भागों में मखाना की पूरी यात्रा को दर्शाती है। कमल के पत्तों के बीच उभरा सफेद 'लावा मखाना', आगे जीआई टैग का प्रतीक और किनारों पर मिथिला पेंटिंग की बॉर्डर। दूसरे खंड में मखाना की कटाई, बीज संग्रह, ग्रेडिंग, भुनाई, फोड़ाई, पैकिंग और क्वालिटी चेक की पूरी प्रक्रिया।

एक ओर मिट्टी के चूल्हे पर लोहे की कढ़ाही में मखाना भूनती महिला, दूसरी ओर लकड़ी के मूसल से मखाना के दाने को फोड़ता पुरुष। यह दृश्य पारंपरिक श्रम, महिला सहभागिता और स्थानीय कौशल को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है।

यह झांकी यह संदेश देती है कि मखाना केवल एक कृषि उत्पाद नहीं, बल्कि यह विरासत, श्रम, महिला भागीदारी और उद्यमिता का संगम है, जो बिहार को सीधे वैश्विक बाजारों से जोड़ता है।