‘रूट-66’ अमेरिका स्टाइल में दौड़ेगा बिहार: 120 की स्पीड, 1KM पहले दिखेगा मोड़, 5 एक्सप्रेस-वे से 3 घंटे में पटना
Bihar's 5 Expressways: बिहार में पांच मेगा एक्सप्रेस-वे का निर्माण तेजी से चल रहा है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था को ...और पढ़ें

5 एक्सप्रेस-वे से 3 घंटे में पटना

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, पटना। Patna in 3 Hours कभी जर्जर सड़कों की चर्चा में रहने वाला बिहार अब हाई-स्पीड एक्सप्रेस-वे नेटवर्क की ओर बढ़ रहा है, और यही बदलाव राज्य की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देने वाला है। एक साथ पांच मेगा एक्सप्रेस-वे पर काम चल रहा है, जिन्हें इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि गाड़ियां 120 किमी/घंटा की रफ्तार से सुरक्षित दौड़ सकें। इन सड़कों की विजिबिलिटी ऐसी होगी कि 1 किलोमीटर पहले से मोड़ नजर आए, ताकि हादसों की आशंका कम हो। लक्ष्य सिर्फ सड़क बनाना नहीं, बल्कि पूरे राज्य को तीन घंटे में राजधानी पटना से जोड़ना है।
उत्तर-दक्षिण की दूरी होगी खत्म
इसी विजन के तहत 225 किमी लंबा आमस-दरभंगा एक्सप्रेस-वे उत्तर और दक्षिण बिहार को सीधे जोड़ेगा। औरंगाबाद के आमस से शुरू होकर दरभंगा तक जाने वाला यह कॉरिडोर गया, जहानाबाद, पटना, वैशाली और समस्तीपुर को जोड़ते हुए आर्थिक गतिविधियों का नया मार्ग खोलेगा। इससे माल ढुलाई आसान होगी और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा। उत्तर बिहार के जिलों को दक्षिण के बाजारों से तेज कनेक्टिविटी मिलने लगेगी।
पूर्वी भारत का स्ट्रैटेजिक लिंक
इसी क्रम में 520 किमी लंबा गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे यूपी, बिहार और पश्चिम बंगाल को जोड़ेगा। बिहार में इसका बड़ा हिस्सा नौ जिलों से गुजरते हुए नेपाल सीमा तक संपर्क मजबूत करेगा। गंडक और कोसी नदियों पर अतिरिक्त पुल इस परियोजना को और मजबूत बनाएंगे। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों और धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी और क्षेत्रीय व्यापार को नई दिशा मिलेगी।
पोर्ट कनेक्टिविटी से बदलेगा खेल
वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेस-वे इस नेटवर्क को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ेगा, क्योंकि यह कोलकाता पोर्ट तक तेज संपर्क देगा। बिहार में कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया से गुजरने वाला यह कॉरिडोर नक्सल प्रभावित और पिछड़े इलाकों में आर्थिक गतिविधि बढ़ाने में मदद करेगा। इसके किनारे प्रस्तावित आर्थिक जोन उद्योग और रोजगार के नए अवसर पैदा करेंगे।
नेपाल से समुद्र तक सीधी रेखा
रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस-वे नेपाल बॉर्डर को सीधे हल्दिया पोर्ट से जोड़ेगा, जिससे आयात-निर्यात का समय और लागत दोनों घटेंगे। 11 जिलों से गुजरने वाला यह मार्ग बिहार को समुद्री व्यापार से सीधा लाभ दिलाएगा। बेगूसराय और मुंगेर के बीच गंगा पर प्रस्तावित 6-लेन पुल इस परियोजना की बड़ी कड़ी होगा। इससे राज्य लॉजिस्टिक हब के रूप में उभर सकता है।
सीमांचल से राजधानी सिर्फ तीन घंटे
इन्हीं परियोजनाओं की श्रृंखला में पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे सीमांचल को राजधानी से जोड़ेगा। सारण से शुरू होकर वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, सहरसा और मधेपुरा होते हुए पूर्णिया तक जाने वाला यह मार्ग उत्तर-पूर्वी बिहार की तस्वीर बदल सकता है। सरकार का लक्ष्य है कि राज्य के किसी भी कोने से पटना पांच घंटे से कम समय में पहुंचा जा सके, जबकि कई इलाकों से यह दूरी तीन घंटे में सिमट जाएगी।
पटना बनेगा एक्सप्रेस-वे हब
इन सभी पांच एक्सप्रेस-वे को पटना से जोड़ने के लिए रिंग रोड और कनेक्टिंग कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं, जिनमें गंगा पर दो बड़े पुल भी शामिल हैं। सिक्स-लेन सड़कों पर रेड लाइट या लेवल क्रॉसिंग नहीं होगी और शहरी क्षेत्रों में एलिवेटेड सेक्शन बनाए जाएंगे। हाई-स्पीड, हाई-सेफ्टी और हाई-कनेक्टिविटी के इस मॉडल के जरिए बिहार अमेरिका के इंटरस्टेट हाईवे सिस्टम जैसी सोच अपनाते हुए ‘स्पीड इकोनॉमी’ की ओर कदम बढ़ा रहा है।

क्यों दुनिया के लिए मॉडल बने अमेरिका के हाईवे?
अमेरिका ने 1956 में राष्ट्रपति ड्वाइट आइजनहावर के दौर में इंटरस्टेट हाईवे सिस्टम की शुरुआत की, जिसका मकसद सिर्फ सड़क बनाना नहीं बल्कि देश को रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा के लिहाज से मजबूत करना था। करीब 66 हजार किलोमीटर लंबे इस नेटवर्क ने शहरों, राज्यों और उद्योगों को तेज रफ्तार से जोड़ा, जिससे लॉजिस्टिक्स सस्ता और कारोबार आसान हुआ। यू.एस. रूट-20 जैसे 5415 किमी लंबे हाईवे और टेक्सास हाईवे-130 पर 136 किमी/घंटा की स्पीड लिमिट इसकी क्षमता दिखाते हैं। पैन-अमेरिकन हाईवे तो पूरे महाद्वीप को जोड़ने वाला 30,600 किमी का नेटवर्क है।
