पुनपुन नदी में 3 KM तक मौत से लड़ती रही बुजर्ग, तेज धारा में साड़ी बनी लाइव जैकेट
पुनपुन नदी में गिरी एक वृद्ध महिला तीन किलोमीटर तक तेज धार में मौत से जूझती रही, जहां उसकी साड़ी ...और पढ़ें
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पुनपुन नदी में डूबने से बची महिला एवं बचाने वाला युवक निशांत कुमार शर्ट पहने हुए, टीशर्ट पहने हुए गुड्डू कुमार। जागरण
HighLights
वृद्ध महिला पुनपुन नदी में तीन किलोमीटर तक बहती रही।
साड़ी बनी जीवन का सहारा, डूबने से बचाया।
दो युवकों ने जान पर खेलकर महिला को सुरक्षित निकाला।
संवाद सहयोगी, पालीगंज। पुनपुन नदी की तेज धार में मंगलवार को एक वृद्ध महिला की जिंदगी करीब तीन किलोमीटर तक मौत से जूझती रही। घर से निकलीं मीना देवी अचानक नदी में जा गिरीं।
तेज बहाव उन्हें अपने साथ बहाता ले गया। वे लगातार मदद के लिए चीखती रहीं, लेकिन हर पल नदी उन्हें किनारे से दूर ले जा रही थी।
करीब तीन किलोमीटर बाद बऊआं गांव स्थित सूर्यमंदिर घाट के समीप उनकी आवाज युवकों तक पहुंची। इसके बाद जो हुआ, उसने इंसानियत की मिसाल कायम कर दी।
कुर्था थाना क्षेत्र के सचई गांव निवासी शिवशंकर पासवान की पत्नी मीना देवी मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे अतौलह स्थित अपनी फुआ के घर जाने के लिए निकली थीं।
किंजर पुल के पास अचानक उनका पैर फिसल गया और वह पुनपुन नदी में जा गिरीं। नदी में गिरते ही उन्होंने बचाने के लिए शोर मचाया, लेकिन तेज धारा के कारण वह संभल नहीं सकीं।
साड़ी बनी जिंदगी का सहारा
नदी की धार में बहते हुए मीना देवी ने हार नहीं मानी। इसी दौरान उनकी साड़ी में हवा और पानी भर गया और वह गुब्बारे की तरह फूल गई। यही साड़ी उनके लिए कुछ देर तक जीवन का सहारा बनी रही और उन्हें पानी में पूरी तरह डूबने से बचाती रही।
तेज बहाव हालांकि उन्हें लगातार बहाकर करीब तीन किलोमीटर दूर ले गया। बऊआं गांव के सूर्यमंदिर घाट के पास पहुंचने पर भी मीना देवी ने मदद की उम्मीद नहीं छोड़ी। वह लगातार चीखती रहीं।
उनकी आवाज सुनकर नदी किनारे मौजूद युवकों का ध्यान पानी की ओर गया। महिला को तेज धार में डूबते देख गांव के पहले निशांत कुमार और फिर गुड्डू कुमार ने अपनी जान की परवाह किए बिना नदी में छलांग लगा दी।
मौत के मुंह से खींच लाई जिंदगी
दोनों युवकों ने तेज बहाव के बीच काफी मशक्कत के बाद मीना देवी को पकड़ लिया। इसके बाद उन्हें सुरक्षित नदी के किनारे लाया गया। ग्रामीणों ने तत्काल उन्हें सूखे कपड़े दिए और उनके स्वजन को सूचना दी।
बाद में मीना देवी को उनके बेटे के सुपुर्द कर दिया गया। इस घटना के बाद बऊआं गांव में निशांत और गुड्डू की बहादुरी की चर्चा है। मीना देवी और ग्रामीणों ने कहा कि दोनों युवक उनके लिए फरिश्ते बनकर आए।
नदी की लहरों के बीच जिस साहस और मानवता का परिचय दोनों युवकों ने दिया, उसने एक जिंदगी को मौत के मुंह से वापस खींच लिया।
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