बिहार में 181 पर 13 लाख से ज्यादा कॉल, सिर्फ 16909 केस दर्ज; 9412 शिकायतें घरेलू हिंसा की
बिहार में महिला विकास निगम की हेल्पलाइन 181 पर साढ़े चार वर्षों में 13 लाख से अधिक कॉल आईं, जिनमें ...और पढ़ें

फोन आते ही शुरू होती है मदद की प्रक्रिया
HighLights
181 हेल्पलाइन पर 13 लाख कॉल, 16,909 मामले दर्ज हुए।
पंजीकृत 16,909 मामलों में 9,412 घरेलू हिंसा से संबंधित।
सखी वन स्टॉप सेंटर, शक्ति सदन महिलाओं को देते हैं सहायता।
सोनाली दुबे, पटना। घर को सुरक्षित जगह माना जाता है, लेकिन कई महिलाओं के लिए चारदीवारी के भीतर ही परेशानी और प्रताड़ना शुरू हो जाती है। बिहार में महिला विकास निगम की हेल्पलाइन 181 पर साढ़े चार वर्षों में 13,17,713 कॉल आईं। इनमें 16,909 मामले पंजीकृत किए गए।
सबसे ज्यादा 9,412 मामले घरेलू हिंसा से जुड़े रहे। इसके अलावा मानसिक प्रताड़ना, दहेज उत्पीड़न और बाल विवाह से संबंधित शिकायतें भी हेल्पलाइन तक पहुंचीं।
16,909 मामलों में 9,412 घरेलू हिंसा के
आंकड़ों के अनुसार पंजीकृत मामलों में 9,412 घरेलू हिंसा से जुड़े हैं। वहीं 2,212 मामलों में तानों और मानसिक प्रताड़ना की शिकायत की गई।
दहेज के लिए उत्पीड़न से जुड़े 1,404 मामले सामने आए, जबकि 177 मामलों में बाल विवाह की सूचना मिली। आंकड़े बताते हैं कि हेल्पलाइन तक पहुंचने वाली महिलाओं की समस्याओं में घरेलू हिंसा सबसे बड़ी वजह रही।
13 लाख कॉल में हर शिकायत केस नहीं बनी
181 पर आई कुल 13,17,713 कॉल में से 16,909 को मामलों के रूप में पंजीकृत किया गया। शेष कॉल में महिलाओं ने सरकारी योजनाओं, साइबर अपराध, कानूनी सलाह और अन्य जरूरी जानकारी के लिए मदद मांगी।
कई मामलों में थाना स्तर पर पहले से कार्रवाई चल रही थी। कुछ मामलों में हेल्पलाइन टीम ने फोन पर ही काउंसलिंग और जरूरी मार्गदर्शन देकर समस्या का समाधान किया।
केस 1: एक फोन ने पहुंचाई मदद, पुलिस ने संभाली स्थिति
पटना की एक शिक्षिका गंभीर मानसिक तनाव से गुजर रही थीं। स्थिति बिगड़ने पर उनके बच्चे ने महिला हेल्पलाइन 181 पर कॉल कर मदद मांगी।
सूचना मिलते ही हेल्पलाइन टीम ने पुलिस से समन्वय किया। पुलिस मौके पर पहुंची और महिला को जरूरी सहायता उपलब्ध कराई गई।
केस 2: प्रताड़ना से परेशान महिला अपना पता तक भूल गई
सिवान की एक महिला प्रताड़ना से इस कदर परेशान थी कि वह अपना पता तक ठीक से नहीं बता पा रही थी। 181 पर सूचना मिलने के बाद टीम ने 112 और सिवान सखी वन स्टाप सेंटर को जानकारी दी। सराय थाने की मदद से महिला के परिजनों का पता लगाया गया और उसके पति से संपर्क कराया गया।
केस 3: 14 साल की बच्ची की शादी की खबर, 181 पर गुपचुप पहुंची सूचना
पटना में एक 14 वर्षीय बच्ची की शादी तय होने की जानकारी सामने आई। बच्ची के फुफेरे भाई ने अपनी पहचान छिपाकर 181 पर कॉल कर इसकी सूचना दी।
हेल्पलाइन टीम ने सखी वन स्टाप सेंटर और पुलिस के साथ समन्वय किया। इसके बाद मौके पर पहुंचकर बाल विवाह को रोकने की कार्रवाई की गई।
फोन आते ही शुरू होती है मदद की प्रक्रिया
181 पर कॉल आने के बाद सबसे पहले महिला की स्थिति और उसकी जरूरत समझी जाती है। अगर जान का तत्काल खतरा हो तो कॉल 112 को ट्रांसफर की जाती है।
पुलिस के पहुंचने के बाद हेल्पलाइन टीम दोबारा संपर्क कर स्थिति की जानकारी लेती है। तत्काल पुलिस की जरूरत नहीं होने पर मामला सखी वन स्टाप सेंटर भेजा जाता है, जहां काउंसलिंग और दूसरी जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
शक्ति सदन में अस्थायी आश्रय, कानूनी मदद का भी प्रावधान
संकटग्रस्त महिलाओं के लिए शक्ति सदन के तहत राज्य में 16 स्थानों पर शेल्टर होम की सुविधा उपलब्ध है। जरूरत के अनुसार महिलाओं को वहां अस्थायी आश्रय दिया जाता है।
मानसिक स्वास्थ्य संबंधी विशेष जरूरत वाली महिलाओं के लिए आसरा गृह की व्यवस्था है। भरण-पोषण या घरेलू हिंसा से जुड़े मामलों में जरूरत के अनुसार कानूनी सहायता और कार्रवाई की प्रक्रिया भी अपनाई जाती है।
2024-25 में 4.07 लाख, 2025-26 में 4.68 लाख कॉल
आंकड़ों के मुताबिक 2022-23 में 83,233 कॉल आईं और 2,602 मामले पंजीकृत हुए। 2023-24 में 1,04,146 कॉल और 2,556 मामले दर्ज हुए।
2024-25 में कॉल की संख्या बढ़कर 4,07,684 और पंजीकृत मामलों की संख्या 5,262 हो गई। 2025-26 में 4,68,074 कॉल आईं और 4,248 मामले पंजीकृत हुए।
अप्रैल-अगस्त 2026 में 2.54 लाख कॉल, 2,241 मामले दर्ज
अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच 181 पर 2,54,576 कॉल आईं। इनमें 2,241 मामले पंजीकृत हुए और 1,878 मामलों का निष्पादन किया गया।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार साढ़े चार वर्षों में कुल 12,878 मामलों का निष्पादन हुआ, जबकि 1,29,691 कॉल में सहायता प्रदान की गई।
