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बिहार में 1.50 लाख क्विंटल गेहूं बीज के इस्तेमाल पर संकट, रबी की बुआई के बीच सरकारी योजना अटकी; महंगे बीज का बोझ 

Published: Sat, 24 Oct 2026 07:00 AM (IST)

बिहार में रबी फसलों की बुआई के बीच गेहूं बीज वितरण योजना लंबित होने से 1.50 लाख क्विंटल बीज के ...और पढ़ें

पांच लाख क्विंटल गेहूं बीज वितरण का लक्ष्य

पांच लाख क्विंटल गेहूं बीज वितरण का लक्ष्य

HighLights

  1. गेहूं बीज वितरण योजना 2026-27 लंबित, संकट गहराया।

  2. 1.50 लाख क्विंटल बीज उपयोग पर संशय, गुणवत्ता प्रभावित।

  3. मसूर, हरा मटर बीज लक्ष्य में भारी कटौती हुई।

राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार में रबी फसलों की बुआई शुरू होने के बीच गेहूं बीज की उपलब्धता और सरकारी बीज वितरण कार्यक्रम पर संकट गहराने लगा है। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में कृषि विभाग की ओर से गेहूं से संबंधित योजना का क्रियान्वयन अब तक लंबित है। 

इसके कारण कृषि विभाग के बीज गुणन प्रक्षेत्रों और बिहार राज्य बीज निगम (बीआरबीएन) के लिए किसानों द्वारा उत्पादित करीब 1.50 लाख क्विंटल गेहूं बीज के उपयोग पर संशय बना हुआ है।

समय पर बीज का वितरण नहीं होने से किसानों को सरकारी बीज का लाभ मिलने में देरी हो सकती है। वहीं, बीज का लंबे समय तक भंडारण होने पर उसकी गुणवत्ता और अंकुरण क्षमता प्रभावित होने की आशंका है।

इससे सरकारी खर्च से तैयार बीज का अपेक्षित लाभ नहीं मिलने के साथ भंडारण और रखरखाव पर अतिरिक्त खर्च भी बढ़ सकता है।

रबी की बुआई के बीच योजना लंबित, किसानों की बढ़ सकती है परेशानी

रबी की बुआई के लिए समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। ऐसे में गेहूं बीज वितरण की योजना लंबित रहने से सरकारी व्यवस्था के तहत तैयार बीज का उपयोग प्रभावित हो सकता है। इसका असर किसानों तक बीज पहुंचने की प्रक्रिया पर भी पड़ने की आशंका है।

यदि सरकारी बीज समय पर उपलब्ध नहीं हुआ तो किसानों को दूसरे स्रोतों से बीज खरीदना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में बाजार से बीज खरीदने का खर्च बढ़ने की आशंका है।

हालांकि, किसानों पर वास्तविक अतिरिक्त बोझ कितना पड़ेगा, यह सरकारी बीज वितरण की स्थिति और बाजार में उपलब्धता पर निर्भर करेगा।

पिछले वर्ष करीब पांच लाख क्विंटल गेहूं बीज वितरण का लक्ष्य था

पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत राज्य के सभी जिलों में गेहूं बीज वितरण के दो कार्यक्रम स्वीकृत किए गए थे।

पहले कार्यक्रम के तहत 65 करोड़ रुपये की लागत से 3.25 लाख क्विंटल गेहूं बीज वितरण की स्वीकृति दी गई थी। इसके माध्यम से आठ लाख एकड़ क्षेत्र में फसल आच्छादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।

इसके बाद चार अक्टूबर 2025 को 36 करोड़ रुपये की लागत से 1.80 लाख क्विंटल गेहूं बीज वितरण का लक्ष्य तय किया गया। इस कार्यक्रम के तहत 4.50 लाख एकड़ क्षेत्र में गेहूं की खेती कराने की योजना थी।

इस प्रकार दोनों कार्यक्रमों के तहत कुल 5.05 लाख क्विंटल गेहूं बीज वितरण का लक्ष्य था और लगभग 12.50 लाख एकड़ क्षेत्र में फसल आच्छादन हुआ था।

समय पर उपयोग नहीं हुआ तो बीज की गुणवत्ता पर पड़ सकता है असर

चालू वित्तीय वर्ष में गेहूं से संबंधित योजना लंबित रहने का असर केवल तैयार बीज के इस्तेमाल तक सीमित नहीं रह सकता। बीज का समय पर वितरण और उपयोग नहीं होने से उसकी गुणवत्ता एवं अंकुरण क्षमता प्रभावित होने की आशंका है।

इसके अलावा, सरकारी बीज उत्पादन कार्यक्रम की अगली कड़ी पर भी असर पड़ सकता है। बीज की उपलब्धता और उपयोग की योजना समय पर नहीं बनी तो आगामी फसल चक्र के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज तैयार करने और किसानों तक पहुंचाने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इससे बीज उत्पादन एवं वितरण व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है।

मसूर बीज वितरण का लक्ष्य 70 हजार से घटकर 25 हजार क्विंटल

गेहूं के साथ दलहन बीज वितरण के लक्ष्य में भी बड़ी कटौती की गई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में दलहन उत्पादन कार्यक्रम के तहत मसूर बीज वितरण का लक्ष्य 70 हजार क्विंटल था। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में इसे घटाकर 25 हजार क्विंटल कर दिया गया है।

इस तरह मसूर बीज वितरण के लक्ष्य में 45 हजार क्विंटल की कमी आई है। बीज वितरण का लक्ष्य घटने से मसूर की खेती के क्षेत्रफल और उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है। यदि खेती का रकबा प्रभावित होता है तो इसका असर राज्य के कुल दलहन उत्पादन पर भी पड़ सकता है।

हरा मटर बीज वितरण का लक्ष्य भी 8,800 क्विंटल घटा

दलहन के साथ हरा मटर बीज वितरण के लक्ष्य में भी उल्लेखनीय कमी की गई है। पिछले वित्तीय वर्ष में हरा मटर उत्पादन कार्यक्रम के तहत 13 हजार क्विंटल से अधिक बीज वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। चालू वित्तीय वर्ष में इसे घटाकर महज 4,200 क्विंटल कर दिया गया है।

इस प्रकार हरा मटर बीज वितरण का लक्ष्य करीब 8,800 क्विंटल घट गया है। इससे राज्य में हरा मटर की खेती और उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

गेहूं, मसूर और हरा मटर के बीज वितरण से जुड़े इन आंकड़ों के बीच अब कृषि विभाग की योजनाओं के समय पर क्रियान्वयन और किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने की व्यवस्था अहम हो गई है।