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सीएम नीतीश का बड़ा एलान... वार्ड सदस्यों को हर साल 2 लाख रुपये फंड, जानिए कब से मिलेगा पैसा?

Published: Tue, 24 Feb 2026 11:17 AM (IST)

बिहार सरकार वार्ड सदस्यों को सालाना 2 लाख रुपये का फंड देने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ...और पढ़ें

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

HighLights

  1. वार्ड सदस्यों को सालाना 2 लाख रुपये का फंड मिलेगा।

  2. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर यह प्रस्ताव बना।

  3. स्थानीय विकास योजनाओं पर खर्च होगी यह राशि।

डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार सरकार ने ग्राम पंचायतों के वार्ड सदस्यों के लिए बड़ा फैसला लेने की तैयारी की है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर वार्ड सदस्यों को सालाना 2 लाख रुपये का फंड देने का प्रस्ताव बनाया जा रहा है। यह राशि स्थानीय विकास योजनाओं पर खर्च की जाएगी। सरकार इस संबंध में जल्द ही केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजेगी। प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने के बाद राशि जारी की जाएगी। इस कदम को पंचायत स्तर पर विकेंद्रीकरण की दिशा में अहम माना जा रहा है।

मनरेगा और अन्य योजनाओं में भागीदारी बढ़ाने की पहल

ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने विधान परिषद में इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फिलहाल मनरेगा के तहत मुखिया को सालाना 10 लाख रुपये तक खर्च करने का अधिकार है। अब वार्ड सदस्यों को भी योजनाओं के चयन और राशि खर्च में भूमिका देने पर विचार हो रहा है।

मनरेगा के साथ अन्य कोषों से भी उन्हें अधिकार देने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा जाएगा। सदन में इस मुद्दे पर लगभग 30 मिनट तक चर्चा हुई। कई सदस्यों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मामला बताया।

वार्ड सदस्यों को अधिकार न मिलने पर उठे सवाल

सदस्य सच्चिदानंद राय ने आरोप लगाया कि कई बार मुखिया वोट आधारित प्राथमिकता से राशि खर्च करते हैं। पूर्व मंत्री संतोष सिंह ने 15वें वित्त आयोग और राज्य वित्त आयोग की राशि में हिस्सेदारी की मांग की।

दिनेश सिंह ने कहा कि चुने हुए प्रतिनिधि होने के बावजूद वार्ड सदस्यों को पर्याप्त अधिकार नहीं हैं। पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पंचायत बैठकों में सहमति बनाकर संतुलित विकास सुनिश्चित किया जाए। सरकार ने संकेत दिया कि व्यवस्था में सुधार पर गंभीरता से विचार होगा।

शिलापट्ट विवाद भी गरमाया

विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने योजनाओं के शिलापट्ट पर नाम अंकन का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि संबंधित क्षेत्र के विधान पार्षद का नाम विधायक से पहले लिखा जाना चाहिए।

राज्य सरकार का इस संबंध में पहले से आदेश जारी है। ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि कई स्थानों पर त्रुटियां सुधारी गई हैं। जहां भी गड़बड़ी होगी, उसे दुरुस्त किया जाएगा। एक मामले में कार्यपालक अभियंता पर कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया।

पंचायत राजनीति में नया संतुलन

वार्ड सदस्यों को फंड देने की पहल पंचायत व्यवस्था में शक्ति संतुलन बदल सकती है। इससे छोटे स्तर पर विकास योजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है।

साथ ही जवाबदेही और पारदर्शिता भी बढ़ सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय केंद्र सरकार की स्वीकृति पर निर्भर करेगा।

अगर प्रस्ताव मंजूर होता है तो राज्य के हजारों वार्ड सदस्यों को सीधा लाभ मिलेगा।सरकार का यह कदम ग्रामीण विकास की दिशा में अहम राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है।