बिहार के सवा तीन करोड़ मजदूरों को झटका, पुरानी दिहाड़ी पर काम करने को मजबूर
बिहार में नई श्रम संहिता के तहत वेज बोर्ड का गठन न होने से 1 अक्टूबर से बढ़ी न्यूनतम मजदूरी ...और पढ़ें

बिहार में वेज बोर्ड गठन में देरी, 3.25 करोड़ से अधिक कामगारों को नहीं मिल रहा बढ़ा हुआ न्यूनतम वेतन (AI Generated Image)
HighLights
अक्टूबर से बढ़ी न्यूनतम मजदूरी दर लागू नहीं हुई।
वेज बोर्ड का गठन न होने से कामगार वंचित हैं।
3.25 करोड़ से अधिक श्रमिकों को नुकसान हो रहा है।
राज्य ब्यूरो, पटना। एक अक्टूबर से बढ़ी हुई न्यूनतम मजदूरी दर के लाभ से राज्य के सवा तीन करोड़ से अधिक कामगार वंचित हो रहे हैं, क्योंकि नई श्रम संहिता के तहत श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग द्वारा वेज बोर्ड का गठन नहीं किया गया है।
इसके कारण बढ़ी हुई न्यूनतम मजदूरी दर लागू नहीं हो पाई है। राज्य सरकार द्वारा वर्ष में दो बार, एक अप्रैल और एक अक्टूबर को, नई न्यूनतम मजदूरी दर निर्धारित की जाती है।
नई दर निर्धारित नहीं होने के कारण कामगारों को अभी कुछ और दिनों तक विगत एक अप्रैल से लागू मजदूरी दर के अनुसार ही कार्य करना पड़ेगा। ऐसे में कामगारों को रोजाना आठ से बारह रुपये तक के नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि राज्य में नई श्रम संहिता लागू है। नई संहिता के अनुसार विभाग में मिनिमम वेज एडवाइजरी बोर्ड का गठन होना है। बोर्ड का गठन प्रक्रियाधीन है। सरकार के शीर्ष स्तर पर अभी इसकी स्वीकृति नहीं मिली है।
नई श्रम संहिता के तहत वेज बोर्ड में एक तिहाई महिलाओं की भागीदारी जरूरी है। कुल 36 सदस्यों वाले इस बोर्ड में 12 सदस्य सरकारी पक्ष (स्वतंत्र), 12 सदस्य कर्मचारी संगठन और 12 सदस्य कंपनियों के होते हैं। बोर्ड ही साल में दो बार न्यूनतम मजदूरी दर निर्धारित करता है और उसी के अनुसार कामगारों को पैसे मिलते हैं।
कृषि क्षेत्र में सर्वाधिक कामगार
राज्य में सर्वाधिक कामगार कृषि क्षेत्र में हैं। श्रम विभाग के पोर्टल पर अभी तीन करोड़ 25 लाख 89 हजार कामगार पंजीकृत हैं। इनमें कृषि प्रक्षेत्र में काम करने वाले एक करोड़ 57 लाख 24 हजार कामगार हैं।
घरेलू कार्यों में 46 लाख 81 हजार, निर्माण क्षेत्र में 31 लाख 51 हजार, कपड़ा उद्योग में 19 लाख 38 हजार तो विविध प्रक्षेत्र में 16 लाख 16 हजार कामगार कार्यरत हैं।
इन कामगारों में 58.10 प्रतिशत महिलाएं और 41.89 प्रतिशत पुरुष हैं। इनमें 18 से 40 वर्ष के बीच 60.87 प्रतिशत, 40 से 50 वर्ष के 22.11 प्रतिशत तथा 50 वर्ष से ऊपर वाले कामगारों की भागीदारी 16.72 प्रतिशत है।
