पटना [एसए शाद] । बिहार विधानसभा चुनाव आनेवाला है, लेकिन कांग्रेस है कि एक्टिव होती ही नहीं है। दशक से पार्टी की पूर्ण कार्यसमिति नहीं है। देखें तो पिछले करीब 10 सालों में प्रदेश कांग्रेस अधिकांश समय बिना पूर्ण कार्य समिति के ही काम करने को मजबूर रही है। वर्तमान में भी इसे पूर्ण कार्य समिति नसीब नहीं है। कार्य समिति के अलावा कई और सहायक संगठनों का विस्तार नहीं हो सका है। अनेक मोर्चा संगठन निष्क्रिय बने हुए हैं। करीब दो साल पूर्व हुए जिला अध्यक्षों के चुनाव के परिणाम भी ठंडे बस्ते में हैं। 


इसे भी पढ़ें: मांझी ने नीतीश को फिर दी सलाह, कहा- BJP से तोड़ दीजिए दोस्‍ती, लालू पर भी कही बड़ी बात

पार्टी आलाकमान ने 2008 में अनिल शर्मा को प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया। वह 2010 तक पद पर बने रहे, मगर पूर्ण कार्य समिति उन्हें कार्यकाल के अंतिम समय मिली। नतीजा यह हुआ कि 2009 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को दो सीटें मिलीं, जबकि 2004 लोकसभा चुनाव में इसके हिस्से तीन सीटें आई थीं। विधानसभा चुनाव में भी पार्टी की सीटें घट गईं। 2010 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रदेश में सिर्फ चार सीटें जीत पाई, जबकि 2005 के विधानसभा चुनाव में इसे 9 सीटों पर कामयाबी मिली थी। इनके बाद चौधरी महबूब अली कैसर प्रदेश अध्यक्ष बने। वर्ष 2010 से 2013 तक वह पद पर रहे, मगर उन्हें भी पूर्ण कार्य समिति नहीं मिली।

हाल के सालों में अशोक चौधरी ही ऐसे प्रदेश अध्यक्ष रहे जिन्हें 300 से अधिक सदस्यों की पूर्ण कार्य समिति उपलब्ध कराई गई। इसका चुनाव पर खातिरख्वाह असर भी देखने को मिला। वह 2013 से 2017 के दौरान प्रदेश अध्यक्ष रहे और इस दौरान 2014 के लोकसभा चुनाव में तो पार्टी सिर्फ दो सीटें ही जीत पाई, मगर अगले वर्ष 2015 में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 27 सीटों पर जीत दर्ज की, मगर अशोक चौधरी के बाद किसी प्रदेश अध्यक्ष को पूर्ण कार्य समिति नहीं मिली है।

इसे भी पढ़ें: पटना HC का जस्टिस राकेश कुमार विवाद और गहराया, सुलझाने को सक्रिय हुए SC व PMO

कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कौकब कादरी का कार्यकाल 27 सितंबर, 2017 से 17 सितंबर, 2018 तक रहा। फिर डाॅ. मदन मोहन झा को 17 सितंबर, 2018 में प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। वर्तमान में वही पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं। डाॅ. झा ने बताया कि प्रदेश कमेटी में अभी चार कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष, 21 कार्य समिति सदस्य और 19 सलाहकार समिति सदस्य हैं। पूर्ण समिति के लिए जब आलाकमान नाम मांगेगा या पार्टी के प्रदेश प्रभारी का निर्णय होगा तो सूची भेजी जाएगी।

कौकब कादरी के कार्यकाल में ही जिलाध्यक्षों, प्रखंड अध्यक्षों एवं डेलीगेट के चुनाव हुए थे, मगर आलाकमान से केवल प्रखंड अध्यक्षों एवं डेलीगेट के निर्वाचन को अनुमोदन मिला है। जिलाध्यक्ष के पद पर वही कार्यरत हैं जिन्हें अशोक चौधरी के समय इस पद पर नियुक्त किया गया था। डाॅ. झा ने कहा कि पूर्व से कार्य कर रहे ऐसे कई जिला अध्यक्ष हैं, जिनके नाम निर्वाचितों की सूची में भी है। ये अपने पद पर काम कर रहे हैं। ऐसी स्थिति पर टिप्पणी करते हुए एक पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सभी जिलाध्यक्ष अशोक चौधरी द्वारा नियुक्त किए गए थे। चौधरी दो साल पहले ही कांग्रेस छोड़ जदयू में चले गए। ऐसे में जिलाध्यक्षों के संबंध में पार्टी को गंभीरता से सोचना चाहिए।

 

Posted By: Rajesh Thakur

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप