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बिहार के विश्वविद्यालयों में अब JNU-BHU की तर्ज पर होगी विदेशी भाषाओं की पढ़ाई, इंटर्नशिप की भी व्यवस्था

Published: Tue, 15 Sep 2026 07:00 AM (IST)

राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में स्नातक स्तर पर जर्मन, फ्रेंच, जापानी सहित कई विदेशी भाषाओं के पाठ्यक्रम लागू होंगे। यह ...और पढ़ें

बिहार के विश्वविद्यालयों में अब विदेशी भाषाओं की पढ़ाई, खुलेंगे रोजगार के नए द्वार (AI Generated Image)

बिहार के विश्वविद्यालयों में अब विदेशी भाषाओं की पढ़ाई, खुलेंगे रोजगार के नए द्वार (AI Generated Image)

HighLights

  1. सभी राज्य विश्वविद्यालयों में स्नातक स्तर पर विदेशी भाषा पाठ्यक्रम।

  2. जर्मन, फ्रेंच, जापानी, कोरियन जैसी प्रमुख भाषाएँ शामिल होंगी।

  3. वैश्विक रोजगार और बेहतर करियर के अवसर मिलेंगे छात्रों को।

दीनानाथ साहनी, पटना। राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में स्नातक स्तर पर कई विदेशी भाषाओं के पाठ्यक्रम लागू होंगे। इसमें जर्मन, फ्रेंच, स्पैनिश, जापानी, कोरियन, चीनी और रूसी जैसी प्रमुख विदेशी भाषाएं शामिल हैं। राज्यपाल एवं कुलाधिपति सैयद अता हसनैन के निर्देश पर पाठ्यक्रम समिति ने जो व्यावासायिक पाठ्यक्रम का नया सिलेबस तैयार किया है उसमें विदेशी भाषा की पढ़ाई को भी शामिल किया है।

नए व्यावसायिक पाठ्यक्रम का प्रारुप सभी कुलपतियों को भेज दिया गया है। इसमें खास बात यह है कि आइआइएम, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय जैसे देश के अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के माडल सिलेबस को व्यावसायिक पाठ्यक्रम का आधार बनाया गया है, जो युवाओं को रोजगार दिलाने में मददगार साबित होंगे।

पाठ्यक्रम समिति का मंतव्य है कि जिन विदेशी भाषाओं को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है, उससे वैश्विक स्तर पर छात्र-छात्राओं के लिए बेहतर रोजगार के अवसर दिलाएंगे। इसमें जर्मन, फ्रेंच, स्पैनिश, जापानी, कोरियन, चीनी और रूसी जैसी प्रमुख विदेशी भाषाओं को प्राथमिकता दी गई है।

विशेषज्ञों की टीम ने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानकों को ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रम का प्रारुप तैयार किया है जिस पर कुलपतियों के मंतव्य आने के बाद उसकी समीक्षा के उपरांत कुलाधिपति की स्वीकृति से लागू किया जाएगा।

नए व्यावसायिक पाठ्यक्रम के तहत जितनी भी विदेशी भाषाएं विद्यार्थियों को पढ़ाई जाएंगी, उनकी फीस एकसमान होगी। साथ ही, सभी विश्वविद्यालयों में करियर काउंसिलिंग सेंटर खोला जाएगा।

राज्यपाल सचिवालय के एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने बताया कि पाठ्यक्रम तैयार करने वाली टीम को दिल्ली विश्वविद्यालय, जवाहर लागू नेहरू विश्वविद्यालय, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर में लागू विदेशी भाषाओं के सिलेबस दिया गया है, जिसके आधार पर राज्य के विश्वविद्यालयों के लिए पाठ्यक्रम तैयार कर लागू किया जाएगा।

पाठ्यक्रम समिति द्वारा जर्मन, रूसी, स्पेनिश, जापानी, कोरियन, चीनी के अलावा मार्डन अरबी, पाली, तिब्बती भाषा और साहित्य, फ्रेंच भाषा, जर्मन भाषा, स्पेनिश भाषा, इतालवी और फारसी विषय के सिलेबस का अध्ययन करने हेतु दिया गया है। इन विषयों में सर्टिफिकेट कोर्स करवाया जाएगा।

राज्य के विश्वविद्यालयों में विदेशी भाषाओं की पढ़ाई शुरू कराने की पहल अच्छी है। इससे विदेशी भाषाओं की पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं को देश और विदेश, दोनों जगहों पर रोजगार के बेहतरीन अवसर मिलेंगे। एक से अधिक भाषा जानने वाले प्रोफेशनल्स के लिए वेतन में बढ़ोतरी और बेहतर करियर विकल्प उपलब्ध होगे। विदेशी भाषा सीखने का सबसे अच्छा फायदा यह है कि अच्छे वेतन वाली नौकरियां आसानी से मिल जाएंगी। - पूर्व कुलपति डॉ. रासबिहारी सिंह, पटना यूनिवर्सिटी