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बिहार के विश्वविद्यालयों में शिक्षकों और कर्मियों को अब समय पर मिलेगा वेतन, राज्यपाल ने दिया निर्देश

Published: Mon, 27 Jul 2026 06:53 PM (IST)

राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने बिहार के विश्वविद्यालयों में शिक्षकों और कर्मचारियों को समय पर वेतन सुनिश्चित करने के लिए ...और पढ़ें

बिहार के विश्वविद्यालयों में शिक्षकों और कर्मियों को अब समय पर मिलेगा वेतन (AI Generated Image)

बिहार के विश्वविद्यालयों में शिक्षकों और कर्मियों को अब समय पर मिलेगा वेतन (AI Generated Image)

HighLights

  1. राज्यपाल ने वेतन भुगतान प्रणाली में बदलाव की पहल की।

  2. विश्वविद्यालयों को सहायक अनुदान अब सीधे कोषागार से मिलेगा।

  3. शिक्षकों और कर्मचारियों को समय पर वेतन सुनिश्चित होगा।

राज्य ब्यूरो, पटना। राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने राज्य के विश्वविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों को ससमय वेतन भुगतान सुनिश्चित कराने की महत्वपूर्ण पहल की है। इसके लिए विश्वविद्यालयों को सहायक अनुदान की दी जाने वाली राशि देने की व्यवस्था बदलने का दिशा-निर्देश दिया है।

विश्वविद्यालयों को सहायक अनुदान के रूप में दी जाने वाली राशि की निकासी कोषागार से करने के लिए विकास आयुक्त की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर उसकी अनुशंसा प्राप्त कर राज्य मंत्रिमंडल से स्वीकृति प्राप्त करने को कहा है।

कमेटी में वित्त विभाग, सामान्य प्रशासन विभाग, उच्च शिक्षा विभाग एवं कुलाधिपति कार्यालय के प्रतिनिधि भी रखे जा सकते हैं।

राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने उच्च शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र भेजा है। पत्र में कहा गया है कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा विभागीय बजट से विश्वविद्यालयों को वेतन एवं अन्य मद में दी जाने वाली राशि सहायक अनुदान के रूप में दी जाती है।

विश्वविद्यालय इस राशि की निकासी कर इसे पीएल खाते में रखते हैं। विश्वविद्यालयों के माध्यम से घाटानुदानित महाविद्यालयों को दी जाने वाली राशि उन महाविद्यालयों के बैंक खाते में दी जाती है।

अंतत: इस राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र पर समय पर नहीं मिल पाने के कारण विभाग द्वारा विश्वविद्यालयों को समय पर राशि विमुक्त नहीं हो पाती है। इसके कारण शिक्षकों एवं कर्मियों को समय पर वेतन भी नहीं मिल पाता है।

पत्र में उच्च शिक्षा सचिव से कहा गया है कि विश्वविद्यालयों को सहायक अनुदान के रूप में दी जाने वाली राशि बजट में प्रविधान किया जाए और विश्वविद्यालयों द्वारा इसकी निकासी कोषागार के माध्यम से की जाए।

इसी प्रकार वेतन के रूप में भुगतान होने वाली राशि को शिक्षकों एवं कर्मियों की एचआरएमएस में प्रविष्टि करते हुए कोषागार से सीधे निकासी की जाए।

इससे विश्वविद्यालय के शिक्षकों व कर्मियों को समय पर वेतन भी मिल पाएगा और उपयोगिता प्रमाण पत्र समय पर नहीं मिल पाने एवं उसके कारण राशि समय पर विमुक्त नहीं होने की समस्या का समाधान भी हो जाएगा।