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बिहार का टूरिज्म होगा हाई-टेक, AI-डिजिटल तकनीक और होमस्टे योजना से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

Published: Mon, 28 Sep 2026 06:00 AM (IST)

बिहार अब अपनी पुरानी पहचान से आगे बढ़कर एआई और आधुनिक तकनीक के सहारे वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान बनाने की तैयारी में है।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

HighLights

  1. एआई और डिजिटल तकनीक से बिहार पर्यटन को मिलेगी नई पहचान।

  2. हेली-टूरिज्म और आधुनिक सुविधाओं से पर्यटकों का अनुभव होगा बेहतर।

  3. पर्यटन से रोजगार सृजन, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा बढ़ावा।

जागरण संवाददाता, पटना। मंदिरों की घंटियां, बुद्ध की धरती, गंगा के घाट, जंगलों की हरियाली और इतिहास की विरासत। बिहार अब इन पहचान से आगे पर्यटन का नया अध्याय लिखने की तैयारी में है।

बिहार की हजारों साल पुरानी विरासत अब आधुनिक तकनीक के साथ कदमताल करती नजर आएगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डिजिटल तकनीक, हेली-टूरिज्म और आधुनिक पर्यटक सुविधाओं के सहारे बिहार को देश ही नहीं, बल्कि वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है।

विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने सिख हेरिटेज गुरुनानक भवन में आयोजित सेमिनार के दौरान कही।

मंत्री ने कहा कि डिजिटल युग में एआई और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल के बिना पर्यटन क्षेत्र में आगे बढ़ना संभव नहीं है। राज्य सरकार पर्यटन को विकास, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए बड़े स्तर पर काम कर रही है।

2025 में बिहार में छह करोड़ 62 लाख से अधिक पर्यटकों का आगमन इस क्षेत्र की बढ़ती संभावनाओं को दर्शाता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1,301 करोड़ रुपये तथा ‘प्रगति यात्रा 2025’ के तहत 2,710 करोड़ रुपये की 36 प्राथमिकता वाली परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।

बदल रहा पर्यटन का परिदृश्य

सीतामढ़ी के पुनौरा धाम में एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से मां सीता के भव्य एवं दिव्य मंदिर का निर्माण कराया जा रहा है।

गयाजी में 2500 करोड़ रुपये की लागत से विष्णुपद मंदिर कॉरिडोर और सोनपुर में 680 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से हरिहरनाथ मंदिर कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। बाबा गरीबनाथ मंदिर, अशोक धाम और अहिल्या स्थान जैसे धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों के विकास पर भी तेजी से काम हो रहा है।

पर्यटकों को मिलेगा नया अनुभव

बिहार में पर्यटन अनुभव को आधुनिक बनाने के लिए भी कई योजनाएं आगे बढ़ाई जा रही हैं। बोधगया में 165 करोड़ रुपये की लागत से बौद्ध ध्यान एवं अनुभव केंद्र, सहरसा की मत्स्यगंधा झील में ग्लास ब्रिज और वाल्मीकि नगर में लव-कुश पार्क विकसित किया जा रहा है।

पटना, राजगीर और वैशाली में फाइव स्टार होटल जैसी सुविधाओं के विस्तार पर भी जोर है। पर्यटकों के लिए हेली-टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा रहा है।

पटना दर्शन, नालंदा और वाल्मीकि नगर जैसे स्थलों की हवाई यात्रा की सुविधा के साथ एयर एम्बुलेंस सेवा की योजना भी तैयार की गई है। पटना के अटल पथ से हरिहरनाथ मंदिर तक रोपवे की योजना भी पर्यटन के अनुभव को नया आयाम देने वाली है।

गांवों तक पहुंचेगा पर्यटन का लाभ

पर्यटन को स्थानीय लोगों की आय और रोजगार से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री होमस्टे योजना के तहत 34 पर्यटन स्थलों के आसपास करीब 1,000 कमरे विकसित किए जा रहे हैं।

इसके लिए लाभार्थियों को प्रति इकाई 11 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जा रही है। पर्यटन नीति के तहत एक लाख लोगों को कौशल विकास प्रशिक्षण देने और अगले पांच वर्ष में 20 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए 25 से 30 प्रतिशत तक पूंजी सब्सिडी का प्रावधान भी किया गया है।

पर्यटन का नया डिजिटल साथी

बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक नंद किशोर ने कहा कि एआइ पर्यटन की पूरी तस्वीर बदलने की क्षमता रखता है।

पर्यटकों की पसंद, उनकी खोज और यात्रा संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण कर उन्हें उनकी जरूरत के अनुरूप पर्यटन स्थल, होटल, भोजन और अन्य सुविधाओं की जानकारी दी जा जाएगी।

रोबोटिक्स और भाषा तकनीक के माध्यम से चीन, जापान, कोरिया जैसे देशों से आने वाले पर्यटकों को उनकी अपनी भाषा में सहायता उपलब्ध कराना भी संभव होगा।

मौके पर बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम के महाप्रबंधक चंदन चौहान, सुनील कुमार सिंह, रचना प्रियदर्शी, प्रो. ज्योति प्रकाश सिंह, प्रो. सम्राट मंडल, प्रभात कुमार, गिरीश सिन्हा समेत अन्य मौजूद रहे।

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