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अब साफ-सुथरे काउंटर पर मिलेगी ताजी मछली, बिहार में सुधा की तर्ज पर 10.56 करोड़ रुपये से बनेंगे 100 कियोस्‍क

Published: Fri, 16 Oct 2026 04:22 PM (IST)Updated: Fri, 16 Oct 2026 04:26 PM (IST)

बिहार सरकार सुधा बूथ की तर्ज पर ताजी मछली बेचने के लिए राज्य में 100 'फ्रेश कैच कियोस्क' स्थापित करेगी। ...और पढ़ें

इस तरह का होगा फ्रेश कैच क‍ियोस्‍क। सौ-विभाग

इस तरह का होगा फ्रेश कैच क‍ियोस्‍क। सौ-विभाग

HighLights

  1. सुधा बूथ की तर्ज पर 100 फ्रेश कैच कियोस्क खुलेंगे।

  2. शहरी उपभोक्ताओं को ताजी मछली, मछली पालकों को बेहतर बाजार।

  3. योजना पर 10.56 करोड़ रुपये खर्च, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

ड‍िजि‍टल डेस्‍क, पटना। सुधा की तर्ज पर बिहार में अब ताजी मछल‍ियां भी काउंटर से म‍िलेंगी। इसके लिए बिहार सरकार फ्रेश कैच कियोस्क स्थापित करने जा रही है।

इसके तहत राज्य में 100 कियोस्क खोले जाएंगे। पहले चरण में 30 और दूसरे चरण में 70 कियोस्क स्थापित करने की योजना है।

पहले चरण में 30 कियोस्क का निर्माण किया जा रहा है और जल्द ही इनका शुभारंभ किया जाएगा। इस पहल से शहरी उपभोक्ताओं को ताजी मछली उपलब्ध कराने के साथ-साथ मछली पालकों को बेहतर बाजार भी मिलेगा।

10:56 करोड़ रुपये होंगे खर्च 

सात निश्चय-3 के तहत प्रस्तावित इस योजना पर अधिकतम 10.56 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अंतर्गत मत्स्य निदेशालय और बिहार एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीएआईडीसीएल) के माध्यम से इसका क्रियान्वयन किया जाएगा।

कियोस्क की स्थापना के लिए सरकारी भूमि, नगर निकायों की भूमि अथवा जिला प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई भूमि का उपयोग किया जाएगा।

पहले चरण में पटना, गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, पूर्णिया, दरभंगा, बेगूसराय, मोतिहारी, बेतिया, हाजीपुर, किशनगंज, कटिहार और मुंगेर सहित प्रमुख शहरों में कियोस्क स्थापित किए जा रहे हैं।

आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे बिक्री केंद्र

फ्रेश कैच कियोस्क में मछलियों के सुरक्षित भंडारण और बिक्री के लिए कोल्ड चेन, डीप फ्रीजर, डिस्प्ले काउंटर, स्वच्छ जल, जल निकासी, बिजली और बैकअप जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

साथ ही उपभोक्ताओं को ताजी मछली उपलब्ध कराने के लिए स्थानीय मत्स्य उत्पादकों एवं फ्रेश कैच कियोस्क संचालकों की एक मजबूत श्रृंखला भी विकसित की जाएगी।

इसके अलावा डिजिटल भुगतान और अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था भी होगी। इससे मछलियों की ताजगी और गुणवत्ता बनाए रखने के साथ-साथ बिक्री केंद्रों पर स्वच्छता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

वर्तमान में कई शहरी क्षेत्रों में मछली की बिक्री पारंपरिक और असंगठित तरीके से होती है। इससे मछलियों के भंडारण, स्वच्छता और गुणवत्ता बनाए रखने में चुनौतियां आती हैं।

कियोस्क स्थापित होने से इन समस्याओं को दूर करने और मत्स्य उत्पादों की आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

निर्माण लागत का 80 प्रतिशत तक देगी सरकार

योजना के तहत एक कियोस्क की निर्धारित इकाई लागत 11 लाख रुपये है। संभावित मूल्य वृद्धि को शामिल करते हुए इसकी अधिकतम लागत 13.20 लाख रुपये आंकी गई है।

सरकार निर्धारित इकाई लागत के 80 प्रतिशत अथवा वास्तविक निर्माण लागत, दोनों में से जो भी कम होगी, उसका वहन करेगी। कियोस्क के निर्माण के लिए एजेंसी या संवेदक का चयन निविदा प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा।

वहीं, संचालन के लिए भी निर्धारित नियमों और शर्तों के अनुसार संचालकों का चयन होगा। केंद्रों के रखरखाव और नियमित संचालन की जिम्मेदारी संबंधित संचालक की होगी।

मत्स्य पालकों को मिलेगा बाजार, बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

योजना के तहत कियोस्क संचालकों के प्रशिक्षण और क्षमता विकास के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मत्स्य निदेशालय अथवा बिहार एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के माध्यम से मछलियों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्थित आपूर्ति श्रृंखला विकसित की जाएगी।

इससे मछली पालकों, मछली किसान उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) और मत्स्य सहकारी समितियों को अपने उत्पाद बाजार तक पहुंचाने का बेहतर अवसर मिलेगा।

नोट-: यह खबर बिहार सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति में दी गई जानकारी के आधार पर बनाई गई है।