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मखाना उत्पादन में बिहार को मिलेगी नई ताकत, 6 जिलों में प्रोसेसिंग यूनिट; किसानों को मिलेगी नई तकनीक की ट्रेनिंग

Published: Thu, 01 Oct 2026 06:00 AM (IST)

बिहार सरकार मखाना उत्पादन और प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए छह कृषि विज्ञान केंद्रों में सूक्ष्म प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित ...और पढ़ें

ब‍िहार में मखाना को लेकर सरकार की नई पहल। सांकेत‍िक तस्‍वीर

ब‍िहार में मखाना को लेकर सरकार की नई पहल। सांकेत‍िक तस्‍वीर

HighLights

  1. छह कृषि विज्ञान केंद्रों में सूक्ष्म मखाना प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित होंगी।

  2. किसानों को मखाना प्रसंस्करण की आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

  3. स्थानीय स्तर पर मखाना आधारित उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलेगा।

राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार में मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ उसके प्रसंस्करण एवं मूल्यवर्धन को गति देने की तैयारी है।

सरकार राज्य के छह कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) में सूक्ष्म मखाना प्रसंस्करण इकाई स्थापित करेगी। चयनित कृषि विज्ञान केंद्रों में अररिया, मधेपुरा, कटिहार, सहरसा, पूर्णिया एवं सुपौल सम्मिलित हैं। 

उद्यान निदेशक की ओर से जारी दिशा-निर्देश के अनुसार इन केंद्रों पर स्थापित होने वाली इकाइयों का उद्देश्य किसानों को मखाना के उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण की आधुनिक तकनीक से जोड़ना है।

किसानों को दी जाएगी अहम जानकारी

इससे स्थानीय स्तर पर मखाना की सफाई, प्रसंस्करण एवं अन्य मूल्यवर्धित गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से किसानों को प्रसंस्करण से जुड़ी तकनीकी जानकारी एवं प्रशिक्षण भी द‍िया जाएगा।

सरकार ने इकाई की स्थापना एवं संचालन को लेकर नियम एवं शर्तें निर्धारित कर दी हैं। बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर को चयनित कृषि विज्ञान केंद्रों में आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर इकाई स्थापित कराने दायित्व दिया गया है।

विश्वविद्यालय की देखरेख में संबंधित केंद्रों पर मखाना प्रसंस्करण से जुड़ी सुविधाओं को विकसित किया जाएगा। मखाना मिथिलांचल एवं सीमांचल की प्रमुख कृषि उपजों में सम्मिलित है।

राज्य के उत्तर-पूर्वी जिलों में इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। वर्तमान में उत्पादन के बाद होने वाली कई प्रसंस्करण गतिविधियां सीमित स्तर पर होती हैं।

ऐसे में कृषि विज्ञान केंद्रों में प्रसंस्करण इकाई स्थापित होने से किसानों और स्थानीय स्तर पर जुड़े लोगों को नई तकनीक का लाभ मिलने की संभावना है।

इन इकाइयों के माध्यम से किसानों को मखाना की गुणवत्ता बनाए रखने, प्रसंस्करण के दौरान होने वाले नुकसान को कम करने एवं उत्पाद को बेहतर बाजार योग्य बनाने की जानकारी दी जाएगी।

इससे मखाना आधारित उद्यमिता को भी प्रोत्साहन मिल सकता है। सरकार का बल उत्पादन के साथ मखाना के प्रसंस्करण एवं मूल्यसंवर्द्ध की पूरी श्रृंखला को सुदृढ़ करने पर है।

छह बिंदुओं पर करना है काम

  1. समय सीमा : शासन ने निर्देश दिया है कि चालू वित्तीय वर्ष यानी अप्रैल-2027 तक पूर्ण करना है। ऐसे में अब मात्र सात महीने शेष हे। समय-सीमा के भीतर कार्य पूर्ण करना अनिवार्य किया गया है।
  2. गुणवत्ता एवं मानक : मखाना प्रसंस्करण के लिए स्थापित की जाने वाली मशीनों एवं उपकरणों की गुणवत्ता एवं क्षमता अनुमोदित मानकों के अनुरूप होनी चाहिए।
  3. स्थान एवं शेड :800 वर्ग फीट शेड या भवन निर्धारित मापदंडों के अनुसार किया जाएगा। कुल लागत परियोजना के 25 प्रतिशत यानि 2.50 लाख रुपये होगी।
  4. संयुक्त जांच व सत्यापन : कार्य पूर्ण होने के पश्चायत संबंधित जिला उद्यान अधिकारी, उप निदेशक (कृषि अभियंत्रण) एवं विज्ञानी /विश्वविद्याल प्रतिनिधि द्वारा संयुक्त जांच प्रतिवेदन एवं अनुशंसा के आलोक में राशि का नियमानुसार भुगतान/समायोजन किया जाएगा।
  5. पंजी संसाधण : स्थापित प्रसंस्करण इकाई से संबंधित आवश्यक पंजी/स्टाक पंजी एवं उपयोगिता विवरण का संधारण संबंधित केवीके द्वारा सुनिश्चित किया जाएगा।
  6. साइन बोर्ड : चयनित केवीके पर इकाई की स्थापना स्थल पर राष्ट्रीय मखाना बोर्ड अंतरगत सूक्ष्म प्रसंस्करण इकाई का एक लोहे का बोर्ड पुल युक्त साइन बोर्ड लगाना अनिवार्य किया गया है।

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