साल में एक बार की जगह अब हर महीने मिलेंगे पैसे, बिहार के 10 हजार वित्त रहित शिक्षकों को होगा फायदा
बिहार में वित्त रहित माध्यमिक व प्लस टू विद्यालयों के 10 हजार शिक्षकों को अब हर महीने तय राशि मिलेगी। ...और पढ़ें

वित्त रहित स्कूलों के शिक्षकों को हर महीने मिलेगी तय राशि। सांकेतिक तस्वीर
HighLights
10 हजार शिक्षकों को हर माह मिलेगा वेतन।
वित्त रहित विद्यालयों के शिक्षकों को फायदा।
राशि सीधे बैंक खाते में होगी ट्रांसफर।
राज्य ब्यूरो, पटना। वित्त रहित माध्यमिक व प्लस टू विद्यालयों में काम कर रहे शिक्षकों को अब हर माह एक तय राशि दिए जाने की तैयारी है।
वर्तमान में यह व्यवस्था है कि वित्त रहित विद्यालयों में काम कर रहे शिक्षकों को वार्षिक रूप से राशि का भुगतान होता रहा है।
हर महीने वित्त रहित विद्यालयों के शिक्षकों को एक तय राशि दिए जाने की कवायद का फायदा 10 हजार शिक्षकों को मिलेगा।
शिक्षा विभाग के पास उपलब्ध आंकड़े के अनुसार वित्त रहित विद्यालयों में लगभग 10 हजार शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के काम में लगे हैं। कक्षा नौ से लेकर प्लस टू तक के बच्चों को वित्त रहित विद्यालयों में पढ़ाया जाता है।
इस तरह तय होगी भुगतान की नई व्यवस्था
वर्तमान में वित्तरहित विद्यालयों के शिक्षकों के भुगतान की व्यवस्था यह है कि मैट्रिक व इंटर के परिणाम के आधार पर उनके लिए एक मुश्त राशि विद्यालय प्रबंधन को उपलब्ध करा दी जाती है।
विद्यालय प्रबंधन अपने स्तर से उनका भुगतान विद्यालय के शिक्षकों को करता है। नई व्यवस्था के तहत अब विद्यालयों को परीक्षा परिणाम के आधार पर मिलने वाली राशि को 12 हिस्सों में विभाजित कर संबंधित विद्यालय के पास उपलब्ध अन्य फंड की राशि को उसमें जोड़ा जाएगा।
इसके बाद हर महीने संबंधित शिक्षकों को उक्त राशि से प्रतिमाह उनके बैंक खाते में सीधे-सीधे राशि भेज दी जाएगी। अब विद्यालय को उनके परफार्मेंस के आधार पर मिलने वाली राशि में विद्यालय प्रबंधन का कोई हस्तक्षेप नहीं रहेगा। राशि सीधे शिक्षकों के खाते में जाएगी।
कई जिलों के वित्तरहित स्कूलों के शिक्षकों के बैंक खाते का ब्योरा उपलब्ध
शिक्षा विभाग ने वित्तरहित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के बैंक खाते का ब्योरा जुटाना आरंभ कर दिया है। कई जिलों से यह उपलब्ध भी हो गया है।
योजना है कि जितनी जल्दी हो सके इस व्यवस्था को आरंभ कर दिया जाए। इस व्यवस्था के क्रियान्वयन का जिम्मा शिक्षा विभाग ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के एक अधिकारी को दिया है।
लंबे समय से चल रही है मांग
वित्त रहित विद्यालय के शिक्षकों के स्तर पर लंबी अवधि से यह मांग चल रही थी कि सरकार उनके लिए जो राशि भेजती है वह उनके बैंक खाते में सीधे अंतरित किया जाए। विद्यालय प्रबंधन पर यह आरोप लगता रहा है कि शिक्षकों के लिए मिली राशि के बंटवारे में मनमानी की जाती है।
