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बिहार में यूनिवर्सिटी शिक्षकों के लिए खुशखबरी, रिसर्च करने वाले प्रोफेसरों को सरकार देगी 10 लाख रुपये

Published: Tue, 18 Aug 2026 06:31 PM (IST)

बिहार सरकार 'मुख्यमंत्री शोध नवाचार योजना' के तहत विश्वविद्यालय शिक्षकों को शोध और नवाचार के लिए 10 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता देगी।

बिहार में यूनिवर्सिटी शिक्षकों के लिए खुशखबरी, रिसर्च करने वाले प्रोफेसरों को सरकार देगी 10 लाख रुपये

बिहार में यूनिवर्सिटी शिक्षकों के लिए खुशखबरी, रिसर्च करने वाले प्रोफेसरों को सरकार देगी 10 लाख रुपये

HighLights

  1. शिक्षकों को शोध हेतु 10 लाख रुपये तक की सहायता।

  2. मुख्यमंत्री शोध नवाचार योजना के तहत मिलेगी वित्तीय मदद।

  3. राज्य के विश्वविद्यालयों में शोध को मिलेगा बढ़ावा।

दीनानाथ साहनी, पटना। बिहार में नवाचार और शोध कार्य के इच्छुक विश्वविद्यालय शिक्षकों को सरकार अधिकतम 10 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता देगी। इसके लिए मुख्यमंत्री शोध नवाचार योजना पर कैबिनेट से शीघ्र ही स्वीकृति ली जाएगी।

प्रस्तावित योजना के अंतर्गत राज्य सरकार के अधीन संचालित सभी 17 विश्वविद्यालयों और चार उच्चस्तरीय शोध संस्थानों से प्रत्येक वर्ष चयनित 80-100 शिक्षकों को नवाचार पर शोध करने हेतु 10 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता देने का प्रविधान किया गया है।

नवाचार परियोजना का चयन त्रिस्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी करेगी। शोध परियोजना का मानक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर का होगा।

बीते माह राज्यपाल सैयद अता हसनैन और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री शोध नवाचार योजना को लागू करने का निर्णय लिया गया था। इस योजना में भाग लेने वाले शिक्षकों के लिए अधिकतम उम्रसीमा 55 वर्ष निर्धारित की गई है।

शोध के इच्छ़ुक शिक्षकों से आनलाइन आवेदन बिहार राज्य उच्च शिक्षा परिषद (बीएसएचईसी) के पोर्टल पर मांगा जाएगा। प्राप्त आवेदनों की जांच त्रिस्तरीय कमेटी करेगी। पहले चरण में कमेटी द्वारा आवेदनों की स्क्रुटनी की जाएगी।

दूसरे चरण में शिक्षाविदों एवं वैज्ञानिकों की गठित हाई-लेवल एक्सपर्ट कमेटी द्वारा आवेदनों की जांच होगी और उनकी अनुशंसा पर उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव द्वारा स्वीकृति दी जाएगी।

इसके बाद तीसरे चरण में प्रोजेक्ट सबजेक्ट पर एक्सर्टनल एक्सपर्ट कमेटी की अनुशंसा ली जाएगी। हालांकि स्टेट-लेवल स्क्रीनिंग कमेटी का चयनित प्रोजेक्ट पर अंतिम निर्णय मान्य होगा।

छह माह से दो साल तक के लिए प्रोजेक्ट वर्क

छह माह से लेकर दो साल के अंदर में प्रोजेक्ट वर्क पूरा करना होगा। हालांकि यह सब रिसर्च सबजेक्ट की प्रकृति पर निर्भर करेगा। रिसर्च पर कार्य करने हेतु सहायता राशि हर माह किस्तों में मिलेगी। कुल अधिकतम राशि दस लाख रुपये होगी।

इसमें 40 प्रतिशत रिसर्च स्टाफ, 25 प्रतिशत फिल्ड वर्क, 20 प्रतिशत स्टडी मैटेरियल, 5 प्रतिशत रिसर्च पेपर और 10 प्रतिशत राशि अन्य मद में खर्च करनी होगी।

चालू वित्तीय वर्ष में इस योजना में 10 करोड़ रुपये की राशि प्रस्तावित की गई है, आने वाले समय में शोध योजना में राशि बढ़ोतरी का भी प्रविधान है।

इन विश्वविद्यालयों व शोध संस्थानों में होगा लागू

पटना विश्वविद्यालय, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, चाणक्य नेशनल ला यूनिवर्सिटी, बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, मौलाना मजहरूल हक अरबी एवं फारसी विश्वविद्यालय, मगध विश्वविद्यालय, जय प्रकाश विश्वविद्यालय, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, बीआरए बिहार विश्वविद्यालय, मुंगेर विश्वविद्यालय, पूर्णिया विश्वविद्यालय, तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, बीएन मंडल विश्वविद्यालय, पटना के ललित नारायण इंस्टीच्यूट ऑफ मैनेजमेंट, एएन सिन्हा सामाजिक अध्ययन संस्थान, डेवलपमेंट मैनेजमेंट इंस्टीच्यूट और चंद्रगुप्त इंस्टीच्यूट ऑफ मैनेजमेंट।

मुख्यमंत्री शोध नवाचार योजना का उद्देश्य प्रदेशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों में नवाचार की संस्कृति को व्यवस्थित ढंग से प्रोत्साहित करना है। सभी विश्वविद्यालयों एवं शोध संस्थानों में पठन-पाठन के साथ-साथ वैज्ञानिक और तकनीकी अनुसंधान (रिसर्च एवं इनोवेशन) के स्तर को बढ़ावा देना अतिआवश्यक है। योग्य शिक्षकों और उनकी टीमों को प्रोजेक्ट के अनुसार आर्थिक अनुदान देने का प्रस्ताव सराहनीय है। इससे प्रदेशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों में नवाचार की संस्कृति को व्यवस्थित ढंग से प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी। - दीपक कुमार सिंह, राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव

शोध को बढ़ावा देना क्यों जरूरी है?

प्रदेश के विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के स्तर से शोध कार्य नहीं के बराबर किए जा रहे हैं। पटना विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति व शिक्षाविद् डॉ. रासबिहारी सिंह का कहना है कि देश के नामचीन उच्च शिक्षण संस्थानों में जिस तरीके के अंतरराष्ट्रीय मानक पर शोध हो रहे हैं वैसे ही स्तर पर राज्य के विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के स्तर से शोध कार्य की जरूरत लंबे अरसे से महसूस की जा रही है। ऐसे में सरकार के स्तर पर ऐसी पहल समय की जरूरत है, अन्यथा राज्य नवाचार व शोध में और पिछड़ते चला जाएगा।