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शिक्षकों के लिए जरूरी खबर: बिहार में ट्रांसफर की नई तारीखों का एलान, 4 से 10 अक्टूबर तक होंगे आवेदन

Published: Wed, 16 Sep 2026 09:00 PM (IST)Updated: Wed, 16 Sep 2026 10:09 PM (IST)

बिहार के सरकारी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के सामान्य स्थानांतरण की तिथि में बदलाव किया गया है। अब शिक्षक 4 ...और पढ़ें

बिहार में शिक्षकों के सामान्य स्थानांतरण की नई तिथि घोषित

बिहार में शिक्षकों के सामान्य स्थानांतरण की नई तिथि घोषित

HighLights

  1. शिक्षकों के सामान्य स्थानांतरण की संशोधित तिथि शिक्षा विभाग ने जारी की।

  2. विद्यालयवार रिक्तियों का प्रकाशन अब 1 अक्टूबर को किया जाएगा।

  3. शिक्षक 4 से 10 अक्टूबर तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।

राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार के सरकारी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के सामान्य स्थानांतरण की तिथि में बदलाव किया गया है। इसे लेकर बुधवार को शिक्षा विभाग ने संशोधित शेड्यूल जारी किया।

अधिसूचना के अनुसार, पहले विद्यालयवार संशोधित रिक्तियों के प्रकाशन की तिथि 16 सितंबर और सामान्य स्थानांतरण के लिए ऑनलाइन आवेदन की अवधि 17 से 23 सितंबर निर्धारित थी।

बाढ़ और प्राकृतिक आपदा के कारण स्थानांतरण के पहले और दूसरे चरण की प्रक्रिया में हुए विलंब को देखते हुए विभाग ने तीसरे चरण की निर्धारित समय-सारणी में बदलाव किया गया है।

अब सामान्य स्थानांतरण के लिए विद्यालयवार संशोधित रिक्तियों का प्रकाशन एक अक्टूबर को किया जाएगा. जबकि चार से 10 अक्टूबर तक सामान्य स्थानांतरण के लिए ऑनलाइन आवेदन होगा।

माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के मुताबिक नए शिड्यूल के तहत सामान्य स्थानांतरण के लिए शिक्षकों को चार से 10 अक्टूबर तक विभागीय पोर्टल पर आवेदन करना होगा। इस दौरान शिक्षक अपनी वरीयता के अनुसार विद्यालयों का विकल्प चुन सकेंगे।

इसके बाद 12 अक्टूबर से 18 नवंबर तक जिला, प्रमंडल और राज्य स्थापना समिति की ओर से सामान्य स्थानांतरण सूची के प्रकाशन, स्थानांतरण सूची पर प्राप्त अपील तथा अपीलों के निष्पादन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

विभागीय अधिसूचना में कहा गया है कि बिहार के विभिन्न जिलों में बाढ़ की गंभीर स्थिति और प्राकृतिक आपदा के कारण स्थानांतरण प्रक्रिया के पहले और दूसरे चरण की गतिविधियों को निर्धारित समय में पूरा करने में अपरिहार्य विलंब हुआ।

इसके अलावा सामान्य स्थानांतरण के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में तकनीकी एवं व्यवहारिक कठिनाइयों को भी ध्यान में रखा गया है।