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बिहार में गन्ना किसानों को जैविक खेती के लिए मिलेगी सब्सिडी, 15 नवंबर तक करें आवेदन

Published: Wed, 16 Sep 2026 11:00 PM (IST)

गन्ना उद्योग विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 तक गन्ना खेती में जैविक उपादानों के उपयोग को बढ़ावा देने की योजना ...और पढ़ें

बिहार में गन्ना किसानों को जैविक खेती के लिए मिलेगी सब्सिडी, 15 नवंबर तक करें आवेदन (AI Generated Image)

बिहार में गन्ना किसानों को जैविक खेती के लिए मिलेगी सब्सिडी, 15 नवंबर तक करें आवेदन (AI Generated Image)

HighLights

  1. गन्ना खेती में जैविक उपादानों के उपयोग को प्रोत्साहन।

  2. किसान 15 नवंबर तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

  3. जैव उर्वरक, कीटनाशी, खाद पर मिलेगा अनुदान।

राज्य ब्यूरो, पटना। गन्ना उद्योग विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में गन्ना की खेती में जैविक उपादानों के उपयोग को प्रोत्साहन की योजना प्रारंभ की है। इसके अंतर्गत गन्ना किसानों को जैव उर्वरक, जैव कीटनाशी, जैव फफूंदनाशी, हरी खाद, कंपोस्ट, वर्मी कंपोस्ट तथा समेकित कीट प्रबंधन से संबंधित उपादानों की खरीद एवं उपयोग पर अनुदान दिया जाएगा।

गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने कहा कि जैविक उपादानों के उपयोग से दीर्घकाल में गन्ने की उत्पादकता एवं चीनी रिकवरी बढ़ाने में सहायता मिलेगी।

योजना का लाभ लेने के लिए गन्ना किसान पंजीकरण आईडी होना आवश्यक है। इसके अंतर्गत रैयत एवं गैर-रैयतकृदोनों श्रेणियों के गन्ना किसान पात्र होंगे। पात्र किसान को अधिकतम एक एकड़ गन्ना क्षेत्र के लिए अनुदान दिया जाएगा।

किसान निर्धारित शर्तों एवं अनुदान सीमा के अधीन योजना के एक अथवा एक से अधिक घटकों का लाभ प्राप्त कर सकेंगे। 16 सितंबर से 15 नवंबर तक विभागीय केन केयर पोर्टल (ccs.bihar.gov.in) पर आनलाइन आवेदन किया जा सकेगा। योजना की अवधि 31 मार्च 2027 तक है।

अनुदान की सीमा:-

  • फेरोमोन ट्रैप अथवा लाइट ट्रैप पर लागत का 75 प्रतिशत या अधिकतम 900 रुपये प्रति एकड़।
  • स्टिकी ट्रैप अथवा ट्राइकोकार्ड पर लागत का 75 प्रतिशत या अधिकतम 350 रुपये प्रति एकड़।
  • ट्राइकोडर्मा, ब्यूवेरिया अथवा मेटाराइजियमर पर लागत का 75 प्रतिशत या अधिकतम 500 रुपये प्रति एकड़।
  • हरा खाद (ढैंचा) पर लागत का 75 प्रतिशत या अधिकतम 500 रुपये प्रति एकड़।
  • कंपोस्ट या वर्मी कंपोस्ट पर लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम तीन हजार रुपये प्रति एकड़।
  • पीएसबी, राइजोबियम, एजोटोबैक्टर अथवा एसीटोबैक्टर जैसे जैव उर्वरक पर लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम 500 रुपये प्रति एकड़।