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सस्ती होगी चीनी: सितंबर के पहले पखवाड़े में बिहार को मिलेगी 25,665 टन चीनी, बदली आपूर्ति व्यवस्था

Published: Thu, 03 Sep 2026 08:00 AM (IST)

केंद्र सरकार ने चीनी की कीमतों पर नियंत्रण और बाजार में आपूर्ति बेहतर बनाने के लिए चीनी मिलों को मासिक ...और पढ़ें

जुलाई-अगस्त से अलग हुआ सितंबर का कोटा

जुलाई-अगस्त से अलग हुआ सितंबर का कोटा

HighLights

  1. चीनी मिलों को अब मासिक की जगह पाक्षिक कोटा मिलेगा।

  2. सितंबर के पहले पखवारे में बिहार को 25,665 टन चीनी।

  3. मिलों को आवंटित चीनी 7 दिन में डिस्पैच करनी होगी।

राज्य ब्यूरो, पटना। चीनी की कीमतों पर नियंत्रण और बाजार में आपूर्ति बेहतर बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने चीनी के कोटे और आपूर्ति व्यवस्था में बदलाव किया है। अब चीनी मिलों को मासिक की जगह पाक्षिक यानी 15-15 दिन के आधार पर बिक्री का कोटा मिलेगा।

यह नई व्यवस्था सितंबर से लागू हो गई है। सितंबर के पहले पखवाड़े के लिए बिहार का चीनी कोटा 25,665 टन तय किया गया है।

जुलाई-अगस्त से अलग हुआ सितंबर का कोटा

जुलाई में बिहार को 48,257 टन और अगस्त में 61,027 टन चीनी का कोटा मिला था। वहीं, सितंबर के पहले पखवाड़े के लिए 25,665 टन चीनी निर्धारित की गई है।

देशभर के लिए जुलाई में 22 लाख टन, अगस्त में 22.50 लाख टन और सितंबर के पहले पखवाड़े के लिए 13 लाख टन चीनी का कोटा तय किया गया है।

पहले सप्ताह में 40 प्रतिशत कोटा बेचना जरूरी

नई व्यवस्था के तहत चीनी मिलों को आवंटित कोटे का कम से कम 40 प्रतिशत हिस्सा पहले सप्ताह में बेचना होगा। शेष चीनी अगले सप्ताह में बेचनी होगी।

बिक्री के बाद मिलों को अधिकतम सात दिन के अंदर चीनी की डिस्पैच भी करनी होगी। इससे सप्लाई चेन में होने वाली अनावश्यक देरी कम होने की उम्मीद है।

अगस्त में अधिक चीनी के बावजूद बढ़ी थी कीमत

बिहार में चीनी की उपलब्धता पहले भी पर्याप्त रही है, लेकिन जमाखोरी की वजह से कीमतों में उछाल की स्थिति बनी। जुलाई की तुलना में अगस्त में राज्य को अधिक चीनी मिली, इसके बावजूद बाजार में कीमतों को लेकर दबाव बना रहा। स्थिति को देखते हुए अगस्त में छापेमारी तक की नौबत आई थी।

मासिक कोटे से सामने आई थीं कई दिक्कतें

अब तक मिलों को पूरे महीने के लिए एकमुश्त बिक्री कोटा दिया जाता था। जांच के दौरान कुछ मिलों के पास घोषित स्टाक से अधिक चीनी होने की बात सामने आई।

वहीं, कुछ मिलों ने निर्धारित मासिक कोटे से कम बिक्री की। कई मामलों में महीने की शुरुआत में बिक्री दर्ज हो गई, लेकिन खरीदारों ने चीनी का उठाव महीने के आखिरी दिनों में किया।

नई व्यवस्था से मांग-आपूर्ति पर रहेगी नजर

चीनी के कोटे को पाक्षिक करने से बाजार में मांग और आपूर्ति की निगरानी पहले की तुलना में आसान होगी। बाजार में किसी तरह का बदलाव होने पर सरकार भी जल्द कदम उठा सकेगी।

माना जा रहा है कि इससे चीनी की उपलब्धता में अचानक आने वाली कमी और कीमतों में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

एक्स-मिल कीमतों में 20 प्रतिशत तक कमी

खाद्य एवं उपभोक्ता मंत्रालय की ओर से चीनी का कोटा तय किया जाता है। मंत्रालय के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में चीनी के एक्स-मिल दाम में 20 प्रतिशत तक की कमी आई है। इसका असर अब खुदरा बाजार में भी दिखाई देने लगा है और कीमतों में नरमी का रुख है।

सरकार बोली-देश में चीनी की कमी नहीं

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है। ऐसे में घबराहट में जरूरत से ज्यादा चीनी खरीदने या खपत से अधिक स्टाक रखने की आवश्यकता नहीं है। नई पाक्षिक कोटा व्यवस्था के जरिए सरकार बाजार में आपूर्ति और कीमतों पर लगातार नजर रखने की तैयारी में है।

चीनी का कोटा (टन में)

क्षेत्र जुलाई अगस्त सितंबर पहला पखवाड़ा
भारत 22,00,000 22,50,000 13,00,000
बिहार 48,257 61,027 25,665