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बिहार में स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का सबसे ज्यादा OBC को मिला लाभ, अब तक 5620.93 करोड़ रुपये का लोन पास

Published: Mon, 15 Jun 2026 03:08 AM (GMT+05:30)

बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना से उच्च शिक्षा में नामांकन बढ़ा है, जिसमें ओबीसी वर्ग को सर्वाधिक लाभ मिला है। ...और पढ़ें

स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना। फाइल फोटो

स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना। फाइल फोटो

HighLights

  1. ओबीसी को सर्वाधिक 5620.93 करोड़ रुपये का ऋण मिला।

  2. योजना में अब तक केवल 2.72% ऋण की वसूली हुई।

  3. छात्र क्रेडिट कार्ड से उच्च शिक्षा में नामांकन दर बढ़ी।

विकाश चन्द्र पाण्डेय, पटना। नई पीढ़ी को लक्ष्य के अनुरूप शिक्षा-दीक्षा के लिए शुरू हुई स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना की सबसे बड़ी समस्या समय से ऋण की वापसी है। हालांकि, पिछले वर्ष नियमों में संशोधन कर सरकार ने ऋण वापसी के लिए दो वर्षों के अतिरिक्त समय का प्रविधान कर दिया है।

ऐसे में दिए गए ऋण को अभी से पूर्णतया गैर निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) मानना उचित नहीं, लेकिन ऋण वापसी की शिथिलता के कारण प्राप्त आवेदनों पर अंतिम निर्णय लेने में एक हिचकिचाहट-सी है।

अधिकारी इस सच्चाई को दबी जुबान बताते हैं, इस तथ्य के साथ कि अभी तक सर्वाधिक ऋण अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए स्वीकृत हुआ है। दूसरे क्रमांक पर सामान्य वर्ग है। सबसे कम 121 करोड़ ऋण की स्वीकृति अनुसूचित जनजाति के लिए हुई है, जिसकी जनसंख्या बिहार में मात्र 1.68 प्रतिशत है।

इस योजना के अंतर्गत अब तक 13501.08 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत हो चुका है। यह आंकड़ा योजना के शुरुआती तारीख (15 जुलाई, 2018) से लेकर इस वर्ष जनवरी अंत तक का है।

उच्च शिक्षा में बढ़ी नामांकन की दर

बहरहाल, वित्त विभाग ने इसके आंकड़ों का विश्लेषण किया है। सरकार के स्तर पर यह समझ अभी कायम है कि इस योजना की बदौलत उच्च शिक्षा में सकल नामांकन दर (जीइआर) में वृद्धि हो रही।

योजना के प्रभावी होने के बाद बिहार की जीईआर 2021-22 में बढ़कर 17.7 प्रतिशत हो गई थी, जो एक वर्ष पहले 14.3 प्रतिशत थी। सर्वाधिक महत्वपूर्ण यह कि ओबीसी के साथ अति-पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) के विद्यार्थी इसका बखूबी लाभ उठा रहे हैं।

बिहार की जनसंख्या में ये दोनों वर्ग सम्मिलित रूप से लगभग 63 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखते हैं। जनसंख्या के अनुपात में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) को भी इसका लाभ कम नहीं।

229.37 करोड़ की वसूली

इस योजना में 42 तरह के पाठ्यक्रमोंं हेतु चार लाख तक का ऋण दिया जाता है। अब तक 8413.53 करोड़ रुपये ऋण का वितरण हो चुका है। वसूली मात्र 229.37 करोड़ की हुई है, जो देय ऋण का 2.72 प्रतिशत है।

ऋण वापसी की अवधि बढ़ी

सरकार ने ऋण को ब्याज मुक्त कर दिया है, जबकि पहले चार प्रतिशत ब्याज की शर्त थी। पहले दो लाख रुपये तक के ऋण वापसी की समय-सीमा पांच वर्ष थी, जो अब सात वर्ष हो गई है। दो लाख से ऊपर का ऋण सात वर्ष के बजाय 10 वर्ष में वापस होगा।

शपथ-पत्र का सहारा

नौकरी मिलने के छह महीने या पढ़ाई समाप्त होने के एक वर्ष बाद ऋण वापसी की प्रक्रिया शुरू होती है। नौकरी या आय नहीं होने पर जून और दिसंबर में शपथ-पत्र देकर अगले छह माह के लिए कर्ज वापसी को टाला जा सकता है।

अब सर्टिफिकेट केस

बहरहाल जिन छात्रों ने कोर्स पूरा होने या नौकरी लगने के बाद भी ऋण नहीं चुकाया है, उनके विरुद्ध सर्टिफिकेट केस दर्ज किए जा रहे हैं और प्राथमिकी की चेतावनी दी जा रही है।

ऋण वापसी नहीं होने के दो प्रमुख कारण

1. बेरोजगारी और कम आय : कई विद्यार्थियों ने सामान्य या तकनीकी कोर्स तो पूरा कर लिया, लेकिन उन्हें अपेक्षित या स्थायी नौकरी नहीं मिली। अच्छी आय के अभाव में वे ईएमआइ नहीं चुका पा रहे।

2. सरकारी गारंटी का दुरुपयोग : राज्य सरकार गारंटर होती है। ऐसे में बहुतेरे विद्यार्थियों और अभिभावकों की यह मानसिकता बन गई है कि यह सरकारी धन है, जिसकी वसूली हेतु दबाव नहीं डाला जाएगा।

श्रेणीवार स्वीकृत आवेदन एवं ऋण राशि

कोटि स्वीकृत आवेदनों की संख्या स्वीकृत ऋण
(करोड़ रुपये)
सामान्य वर्ग 1,24,138 4,032.45
ओबीसी 1,84,050 5,620.93
ईबीसी 82,281 2,377.68
एससी 46,670 1,349.02
एसटी 4,175 121.00
कुल 4,41,314 13,501.08