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Bihar Sports: अब AI से होगी खिलाड़ियों की परख, IIT मद्रास करेगा वैज्ञानिक आकलन; ओलंपिक तैयारी को मिलेगा बढ़ावा

Published: Wed, 30 Sep 2026 09:29 PM (IST)

बिहार राज्य खेल प्राधिकरण और IIT मद्रास ने खिलाड़ियों की प्रतिभा पहचानने के लिए AI, खेल विज्ञान और डेटा एनालिसिस ...और पढ़ें

बिहार के बच्चों के लिए बिहार से बनेगा वैज्ञानिक मानक

बिहार के बच्चों के लिए बिहार से बनेगा वैज्ञानिक मानक

HighLights

  1. बिहार खेल प्राधिकरण और IIT मद्रास के बीच समझौता।

  2. AI, खेल विज्ञान से खिलाड़ियों की प्रतिभा पहचान।

  3. 'मशाल' डेटा से 2036 ओलंपिक के लिए तैयारी।

जागरण संवाददाता, पटना। बिहार के खिलाड़ियों की प्रतिभा अब सिर्फ मैदान पर प्रदर्शन देखकर नहीं परखी जाएगी। कौन खिलाड़ी किस खेल के लिए ज्यादा उपयुक्त है, उसकी क्षमता कितनी है और प्रशिक्षण में किस तरह सुधार की जरूरत है, इन सवालों के जवाब अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), खेल विज्ञान और डेटा एनालिसिस से तलाशे जाएंगे। इसके लिए बिहार राज्य खेल प्राधिकरण (BSSA) और IIT मद्रास के बीच बुधवार को समझौता हुआ है।

‘मशाल’ के डेटा से खोजी जाएगी छिपी प्रतिभा

इस पहल के तहत बिहार के स्कूली बच्चों के ‘मशाल कार्यक्रम’ में जुटाए गए आंकड़ों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा। बच्चों की लंबाई, वजन, दौड़, कूद और फेंक समेत सात शारीरिक व प्रदर्शन संबंधी मानकों के डेटा का उपयोग होगा। IIT मद्रास उन्नत सांख्यिकी और AI की मदद से इन आंकड़ों को खंगालेगा।

बिहार के बच्चों के लिए बिहार से बनेगा वैज्ञानिक मानक

सबसे खास बात यह होगी कि राज्य के बच्चों की क्षमता का आकलन स्थानीय आंकड़ों के आधार पर तैयार मानकों से किया जाएगा। इससे अलग-अलग जिलों की खेल प्रतिभाओं की तस्वीर सामने आ सकेगी। जिला स्तर पर प्रतिभा मानचित्र तैयार होने से ग्रामीण और पिछड़े इलाकों के खिलाड़ियों को पहचानने में मदद मिल सकती है।

किस जिले में कितने कोच चाहिए, डेटा बताएगा

आंकड़ों के आधार पर भविष्य में प्रशिक्षण केंद्रों और कोच की जरूरत का आकलन भी किया जाएगा। इसके साथ विकास एवं फिटनेस मानक, एथलेटिक क्षमता सूचकांक और निर्णय-सहायक डैशबोर्ड तैयार किए जाएंगे। यानी खिलाड़ियों की पहचान से लेकर प्रशिक्षण की योजना तक में डेटा की भूमिका बढ़ेगी।

भारोत्तोलकों की तकनीक कैमरे से होगी चेक

इस समझौते का एक अहम हिस्सा भारोत्तोलन है। प्रशिक्षण केंद्र में लगाए गए कैमरों की मदद से AI खिलाड़ी की तकनीक, संतुलन और भार उठाने की दिशा का विश्लेषण करेगा।

इसके लिए खिलाड़ी के शरीर पर सेंसर लगाने की जरूरत नहीं होगी। इससे कोच को प्रशिक्षण के दौरान तकनीकी कमियों का वस्तुनिष्ठ आकलन मिल सकेगा।

आगे दूसरे खेलों में भी लागू होगा मॉडल

प्राधिकरण के अनुसार, भारोत्तोलन में शुरू होने वाला यह मॉडल आगे दूसरे खेलों तक भी ले जाया जा सकता है। पूरी प्रक्रिया में बच्चों की निजता का ध्यान रखने की बात कही गई है और पहचान-रहित जानकारी का उपयोग किया जाएगा। तैयार डेटा, डैशबोर्ड, AI मॉडल और उपकरण BSSA की संपत्ति होंगे।

‘मशाल से मेडल तक’ का लक्ष्य

BSSA के महानिदेशक रवीन्द्रण शंकरण ने कहा कि यह पहल 2036 ओलंपिक के लिए भारत के लक्ष्य से प्रेरित है। उनका कहना है कि राज्य की कोशिश है कि गांवों में मौजूद प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें विश्वस्तरीय अवसर दिए जाएं। IIT मद्रास की ओर से भी विज्ञान और खेल के इस समन्वय को ओलंपिक तैयारियों के लिए उपयोगी बताया गया है।