बिहार की विकास रफ्तार को और तेज करने पर जोर, संसाधनों की बर्बादी रोकें; 12 शहरों में बनेंगी टाउनशिप
बिहार एसडीजी कॉन्क्लेव में राज्य के विकास को गति देने और संसाधनों के अपव्यय को रोकने पर मंथन हुआ। इसमें ...और पढ़ें

12 शहरों में तैयार होंगी आधुनिक टाउनशिप(AI फोटो)
HighLights
संसाधनों के अपव्यय को रोककर विकास को मिलेगी गति।
बिहार के 12 शहरों में बनेंगी आधुनिक टाउनशिप।
स्वच्छ जल व स्वच्छता में बिहार देश में तीसरे स्थान पर।
राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार एसडीजी कान्क्लेव-2026 के समापन सत्र में राज्य के विकास को नई दिशा देने पर मंथन हुआ। उप मुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि संसाधनों के अपव्यय को रोककर विकास के क्षेत्र में बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि समय के साथ लोगों की जरूरतें बदल रही हैं, इसलिए तकनीक और कार्यप्रणाली में भी बदलाव जरूरी है।
उन्होंने विकास के लिए उचित खर्च, नई तकनीक और बदलती जरूरतों के अनुरूप काम करने पर जोर दिया। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार मौसम सेवा केंद्रों के क्षेत्र में अग्रणी है और पंचायत स्तर तक मौसम पूर्वानुमान पहुंचाने की दिशा में काम हो रहा है।
12 शहरों में तैयार होंगी आधुनिक टाउनशिप
नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि दुनिया की करीब 55 प्रतिशत आबादी शहरों में रहती है और वैश्विक जीडीपी में शहरों का योगदान 80 प्रतिशत से अधिक है। इसी को ध्यान में रखते हुए बिहार के 12 शहरों में टाउनशिप विकसित की जा रही हैं।
इन टाउनशिप में रहने वाले लोगों को बिजली, पानी, स्वास्थ्य, इंटरनेट और गुणवत्तापूर्ण सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी। इसके अलावा पार्क, शिक्षा और खेल की सुविधाओं के साथ पर्यावरण सुरक्षा से जुड़े उपाय भी किए जाएंगे।
स्वच्छ जल और स्वच्छता में बिहार देश में तीसरे स्थान पर
योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव डा. एन विजयलक्ष्मी ने बिहार की उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि स्वच्छ जल और स्वच्छता श्रेणी में 98 अंक के साथ बिहार देश में तीसरे स्थान पर है।
इस योजना के तहत सितंबर 2025 तक 26,960.3 करोड़ रुपये खर्च किए गए और 1.75 करोड़ ग्रामीणों को नल का कनेक्शन दिया गया। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की पहुंच बढ़ी है।
2.25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले
नीति आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया कि 2015-16 से 2019-21 के बीच बिहार में बहुआयामी गरीबी 51.8 प्रतिशत से घटकर 33.7 प्रतिशत रह गई। इस अवधि में करीब 2.25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले।
वहीं वर्ष 2024-25 में बिहार की आर्थिक विकास दर 13.2 प्रतिशत रही। यह राष्ट्रीय औसत 9.8 प्रतिशत से काफी अधिक है। सम्मेलन में राज्य की इस आर्थिक प्रगति को आगे बढ़ाने की रणनीति पर भी चर्चा हुई।
नीति आयोग में शामिल किए जाएंगे उपयोगी सुझाव
नीति आयोग के सदस्य केवी राजू ने कहा कि संगोष्ठी में आए उपयोगी सुझावों को नीति आयोग में शामिल किया जाएगा। इसके लिए प्रस्ताव योजना विभाग की ओर से आयोग के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।
उन्होंने कहा कि बेहतर डेटा कलेक्शन और पंचायत स्तर पर इंडेक्स तैयार करके जरूरतमंद लोगों की पहचान की जा सकती है। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
अधिकारी और विशेषज्ञ भी हुए शामिल
कान्क्लेव में पूर्व विकास आयुक्त डा. एस. सिद्धार्थ, ऊर्जा विभाग के सचिव अजय यादव, पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार और जीविका की अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी अनन्या सिंह शामिल हुईं।
इसके अलावा पटना के डीएम कुंदन कुमार, मधुबनी के डीएम आनंद शर्मा, वित्त विभाग की सचिव रचना पाटिल, यूनिसेफ की प्रतिनिधि क्रिस्टिना पोपिवानोवा समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी, विशेषज्ञ और प्रतिनिधि मौजूद रहे।
