बिहार में सेटेलाइट टाउनशिप के लिए जमीन बेचने में रैयतों की बढ़ी रुचि; ग्रामीण जमीन पर 4 गुना दाम
भू-स्वामियों की रुचि बढ़ने से बिहार में 12 ग्रीनफील्ड सेटेलाइट टाउनशिप के लिए भूमि अधिग्रहण में तेजी आई है, आवास बोर्ड को अब तक 367 आवेदन मिले हैं।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।
HighLights
आवास बोर्ड को 6 टाउनशिप के लिए 367 आवेदन मिले।
पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड टाउनशिप के लिए सर्वाधिक 330 आवेदन।
शहरी भूमि को दोगुना, ग्रामीण को चार गुना मुआवजा।
जागरण संवाददाता, पटना। राज्य में प्रस्तावित 12 ग्रीनफील्ड सेटेलाइट टाउनशिप के लिए अधिसूचित जमीन बेचने को लेकर भू-स्वामियों की रुचि लगातार बढ़ रही है।
बिहार राज्य आवास बोर्ड को अब तक छह सेटेलाइट टाउनशिप के लिए 367 आवेदन प्राप्त हुए हैं। आवेदन मिलने के बाद आवास बोर्ड सात दिनों के भीतर उसकी प्रारंभिक जांच कर रहा है।
इसके बाद भूमि का मूल्य 100 करोड़ रुपये तक होगा तो प्रस्ताव संबंधित जिलाधिकारी (डीएम) के पास जाएगा। वहीं, 100 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की जमीन के मामलों का प्रस्ताव प्रमंडलीय आयुक्त को भेजा जाने का प्रविधान है।
जिला या प्रमंडलीय रैयती भूमि क्रय समिति जमीन की जांच कर बिहार रैयती भूमि क्रय नीति-2026 के तहत उसकी दर, कुल मूल्य और अन्य पहलुओं का आकलन करेगी।
इसके बाद भू-स्वामी से अंतिम लिखित सहमति लेकर प्रस्ताव सक्षम प्राधिकार की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद बिहार राज्य आवास बोर्ड सात दिनों के भीतर भू-स्वामी को भुगतान करेगा।
इसके बाद अधिकृत पदाधिकारी की देखरेख में विक्रय विलेख का निबंधन और जमीन का नामांतरण आवास बोर्ड के पक्ष में कराया जाएगा।
इस पूरी प्रक्रिया में खरीदी जाने वाली भूमि पर स्टांप शुल्क और पंजीयन शुल्क नहीं लगेगा। जमीन खरीद की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग पहले ही विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी कर चुका है।
आवास बोर्ड के अनुसार, सबसे अधिक 330 आवेदन पटना जिले में प्रस्तावित पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सेटेलाइट टाउनशिप के लिए मिले हैं।
सारण सेटेलाइट टाउनशिप के लिए 17, मगध के लिए छह, कोसी और तिरहुत के लिए पांच-पांच तथा मिथिला सेटेलाइट टाउनशिप के लिए चार आवेदन मिले हैं।
पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सेटेलाइट टाउनशिप का दायरा काफी बड़ा है। इसमें पटना जिले के नौ प्रखंडों के 274 राजस्व गांवों और पुनपुन नगर पंचायत के छह वार्डों को शामिल किया गया है।
परियोजना में दनियावां, धनरुआ, फतुहा, मसौढ़ी, नौबतपुर, पटना ग्रामीण, फुलवारी, पुनपुन और संपतचक प्रखंड शामिल हैं। इनमें सबसे अधिक 85 राजस्व गांव पुनपुन प्रखंड के हैं।
इसके अलावा फतुहा के 70, नौबतपुर के 49, धनरुआ के 24, मसौढ़ी के 14, संपतचक के 10, दनियावां और फुलवारी के आठ-आठ तथा पटना ग्रामीण के छह राजस्व गांव इस योजना का हिस्सा बनाए गए हैं।
इन अधिसूचित क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री, हस्तांतरण, विकास कार्य और भवन निर्माण पर 30 मार्च 2027 तक रोक लगाई गई है। हालांकि विशेष परिस्थितियों में भू-स्वामियों को अपनी जमीन सरकार को बेचने की अनुमति दी गई है।
भू-स्वामी के बैंक खाते का विवरण भी देना जरूरी
जमीन बेचने के इच्छुक भू-स्वामी बिहार राज्य आवास बोर्ड के प्रबंध निदेशक के नाम आवेदन कर रहे हैं। आवेदन सोमवार से शुक्रवार तक आवास बोर्ड मुख्यालय स्थित समाधान केंद्र में जमा किए जा रहे हैं।
आवेदन के साथ निबंधित डीड या खतियान की प्रति, जमाबंदी रसीद, आधार कार्ड और भू-स्वामी के बैंक खाते का विवरण भी देना अनिवार्य है। भूमि का भुगतान उसी बैंक खाते में किया जाएगा, जिसकी जानकारी आवेदन के समय दी जाएगी।
शहरी और ग्रामीण जमीन के लिए अलग मुआवजा
सरकार ने भू-स्वामियों के लिए आकर्षक मुआवजा व्यवस्था भी तय की है। शहरी क्षेत्र की जमीन के लिए बाजार मूल्य या न्यूनतम सरकारी दर (एमवीआर) का दोगुना भुगतान किया जाएगा।
वहीं, ग्रामीण क्षेत्र की जमीन के लिए बाजार मूल्य या एमवीआर का चार गुना मुआवजा मिलेगा। इसके अलावा ग्रामीण भूमि के मुआवजे पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी।
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