यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 05, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
बिहारः बालू माफियाओं की कमर तोड़ने की तैयारी, बड़ी कार्रवाई के लिए 'कुंडली' तैयार
अफसरों के बाद अब माफिया की कमर तोड़ने की तैयारी है। इनमें कई हाईप्रोफाइल चेहरे समाजसेवी और नेता शामिल हैं। ...और पढ़ें

प्रशांत कुमार, पटना। बालू के अवैध खनन, भंडारण और बिक्री में सहयोग करने के आरोपित अफसरों के बाद अब माफिया की कमर तोड़ने की तैयारी है। इनमें कई हाईप्रोफाइल चेहरे, समाजसेवी और नेता शामिल हैं। सेंट्रल रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आइजी) के निर्देश पर बनी पांच टीमों ने बालू के अवैध कारोबार से जुड़े 10 संदिग्ध लोगों की जांच रिपोर्ट सौंप दी है।
विभागीय सूत्रों की मानें तो आठ संदिग्धों की जांच रिपोर्ट 50 से अधिक पन्नों में है। वहीं, दो संदिग्धों की पत्नी और बच्चों की संपत्ति मिलाकर जांच रिपोर्ट 200 से अधिक पेज में तैयार की गई है। इस रिपोर्ट में कई अचंभित करने वाले तथ्यों का भी जिक्र है। हालांकि, यह रिपोर्ट तत्कालीन आइजी संजय सिंह और तत्कालीन एसएसपी उपेंद्र कुमार शर्मा के कार्यालय में तैयार कर पिछले साल 30 नवंबर को भेजी गई थी। सूत्र बताते हैं कि कई स्तरों से होकर ये रिपोर्ट आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) तक पहुंच गई है। इन पर पीएमएलए (प्रिवेंशन आफ मनी लाउंङ्क्षड्रग एक्ट) 2002 के तहत बड़ी कार्रवाई की रूपरेखा बनाई जा रही है।
पांच संदिग्ध ब्राडसन कंपनी से जुड़े
तत्कालीन एसएसपी ने 10 संदिग्धों की जांच के लिए पांच टीमें बनाई थीं। इनमें से तीन टीमों का नेतृत्व दानापुर एएसपी सैयद इमरान मसूद कर रहे थे। वहीं, दो टीमें पालीगंज एएसपी अवधेश दीक्षित के नेतृत्व में जांच कर रही थी। टीम में इंस्पेक्टर और दारोगा संवर्ग के पुलिस अधिकारी शामिल किए गए थे। जांच की जद में आए 10 में से पांच संदिग्ध ब्राडसन कंपनी से जुड़े हैं। वहीं, एक संदिग्ध और उनके दो पुत्रों पर भी पैनी नजर रखने का निर्देश दिया गया था। ये संदिग्ध भी पहले ब्राडसन कंपनी का निदेशक था। बालू माफिया पर नकेल कसने की कार्रवाई शुरू होते ही उसने कंपनी से नाता तोड़ लिया।
चुनाव भी लड़ चुका है एक संदिग्ध
दानापुर एएसपी, सर्किल इंस्पेक्टर माशूक अली और थानाध्यक्ष अजीत कुमार साहा की टीम जिस संदिग्ध का ब्योरा खंगाल रही थी, वो पहले विधायक और सांसद का चुनाव भी लड़ चुके हैं। उन्होंने चुनाव के दौरान कितने रुपये खर्च किए, आमदनी का स्रोत क्या रहा, रिपोर्ट में इसका भी जिक्र है। सूत्रों की मानें तो इस संदिग्ध के नाम पर काफी कम संपत्ति है, जबकि इन्होंने अपनी पत्नी और बच्चों के नाम से झारखंड में चार कंपनियां खोल रखी हैं। वहां भी बालू का कारोबार कर रहे हैं।
हटाए जाएंगे संदिग्धों के बाडीगार्ड
सूत्रों के मुताबिक, 10 में से सात संदिग्धों के पास सरकारी अंगरक्षक हैं। पीएमएलए की कार्रवाई शुरू होने से पहले इनके बाडीगार्ड हटा दिए जाएंगे। इसके लिए बिहार पुलिस की स्पेशल ब्रांच की सुरक्षा समिति से रिपोर्ट मांगी जा रही है कि आखिर इन्हें किस आधार पर बाडीगार्ड मुहैया कराया गया। इनमें से कितनों को शुल्क लेकर अंगरक्षक प्रदान किया गया है और कितने मुफ्त में सेवा ले रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि अधिकांश को जिला स्तर के अधिकारियों की सिफारिश पर निशुल्क बाडीगार्ड दिया गया है। संभव है कि कार्रवाई के घेरे में आए बालू माफिया को बाडीगार्ड देने के लिए पैरवी करने वाले अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।
