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बिहार में राजस्व कर्मचारियों के तबादले की नई नीति, एक जिले में अब अधिकतम पांच साल रह सकेंगे

Published: Sat, 22 Aug 2026 06:53 PM (GMT+05:30)

बिहार में राजस्व कर्मचारियों के तबादले और पदस्थापन के लिए नई नीति लागू की गई है, जिसके तहत वे एक ...और पढ़ें

पांच साल बाद दूसरे जिले में तबादला जरूरी

पांच साल बाद दूसरे जिले में तबादला जरूरी

HighLights

  1. राजस्व कर्मचारियों के तबादले की नई नीति लागू।

  2. एक जिले में अधिकतम पांच साल का कार्यकाल।

  3. जून में होंगे सामान्य तबादले, पैरवी पर कार्रवाई।

राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार में राजस्व कर्मचारियों के तबादले और पदस्थापन को लेकर नई नीति लागू कर दी गई है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने बिहार राजस्व कर्मचारी पदस्थापन नीति 2026 जारी की है।

इसके तहत किसी एक जिले में राजस्व कर्मचारी सामान्य तौर पर तीन साल तक रह सकेंगे और विशेष परिस्थिति में अधिकतम पांच साल तक पदस्थापन बढ़ाया जा सकेगा।

पांच साल बाद दूसरे जिले में तबादला जरूरी

नई व्यवस्था के तहत किसी कर्मचारी का एक जिले में अधिकतम पदस्थापन काल पांच साल निर्धारित किया गया है। हालांकि विशेष परिस्थितियों में पर्यवेक्षी अधिकारी की अनुशंसा पर कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है। यह नीति तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।

जून में ही होगा सामान्य तबादला

नई नीति के अनुसार राजस्व कर्मचारियों का सामान्य तबादला प्रत्येक वर्ष जून महीने में किया जाएगा। हालांकि प्रशासनिक आधार पर होने वाले तबादलों को इस व्यवस्था से अलग रखा गया है। कार्यहित में जरूरत पड़ने पर साल के अन्य समय में भी तबादला किया जा सकता है।

तबादले के लिए पांच जिलों का विकल्प मिलेगा

राजस्व कर्मचारियों को तबादले के लिए पांच जिलों का विकल्प देने की व्यवस्था की गई है। हालांकि विभाग ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारी का तबादला उन्हीं पांच जिलों में हो, यह जरूरी नहीं है। विकल्प देना व्यवस्था का हिस्सा है, इसे कर्मचारी का अधिकार नहीं माना जाएगा।

राज्य स्तरीय संवर्ग बनने के बाद बदली व्यवस्था

राजस्व कर्मचारियों का राज्य स्तरीय संवर्ग पिछले साल बनाया गया था। इससे पहले वे जिला संवर्ग के कर्मचारी होते थे और दूसरे जिले में उनका तबादला नहीं किया जाता था। अब राज्य स्तरीय संवर्ग बनने के बाद अंतरजिला तबादले का रास्ता साफ हुआ है।

पैरवी की तो मांगा जाएगा स्पष्टीकरण

नई नीति में कर्मचारियों को तबादले के लिए पैरवी या अनुशंसा का सहारा नहीं लेने की हिदायत दी गई है। ऐसा करने पर संबंधित कर्मचारी से स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है और इसकी जानकारी सेवा पुस्तिका में भी दर्ज की जाएगी। विभाग ने तबादला प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर दिया है।